यूपी के इस जिले के किसान खेतों में रख रहे ‘कफन’, वजह जान आप भी हो जाएंगे हैरान

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यूपी के इस जिले के किसान खेतों में रख रहे ‘कफन’, वजह जान आप भी हो जाएंगे हैरान


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Jaunpur News: जौनपुर के किसान खेतों की सुरक्षा के लिए कफन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे जानवर और चोर डरकर दूर रहते हैं. सफेद कफन को खेतों में इस तरह बांधा जाता है कि रात में यह दूर से किसी लाश की तरह दिखता है. जान…और पढ़ें

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कफन से खेत की सुरक्षा 

हाइलाइट्स

  • जौनपुर के किसान खेतों में कफन का उपयोग कर रहे हैं.
  • कफन से जानवर और चोर खेतों से दूर रहते हैं.
  • यह तरीका सस्ता और प्रभावी है, पर स्थायी नहीं.

जौनपुर:  खेती की सुरक्षा के लिए आमतौर पर किसान बाड़  या रासायनिक उपायों का सहारा लेते हैं, लेकिन जौनपुर के कुछ किसान एक अनोखा और चौंकाने वाला तरीका अपना रहे हैं. ये किसान खेतों की रखवाली के लिए कफन का इस्तेमाल कर रहे हैं. दूर से देखने पर यह ऐसा लगता है जैसे कोई शव पड़ा हो, जिससे जानवर और चोर खेतों से दूर रहते हैं.

क्यों कर रहे हैं किसान ऐसा?

जौनपुर के कई इलाकों में खेतों को आवारा जानवरों से बचाना बड़ी चुनौती बन गया है. किसान महंगी बाड़ लगाने में सक्षम नहीं हैं और न ही हर समय खेत में पहरा दे सकते हैं. ऐसे में उन्होंने एक अनोखा तरीका खोज निकाला. खेतों के कोनों में कफन से अपनी खेतों की सुरक्षा कर रहे है. “रात में जंगली सुअर, नीलगाय और अन्य जानवर फसल बर्बाद कर देते हैं. किसान कई तरीके आजमा चुके थे, लेकिन सब बेअसर रहा. एक दिन किसी ने मजाक में कहा कि अगर खेत में कफन डाल दिया जाए तो शायद डर से जानवर न आएं, तो यह प्रयोग किया और यह सफल रहा.

कैसे काम करता है यह अनोखा तरीका?

भय का माहौल: सफेद कफन को खेतों में इस तरह बांधा जाता है कि रात में यह दूर से किसी लाश की तरह दिखता है. जानवरों और इंसानों दोनों पर इसका  असर होता है. जंगली जानवरों को यह अनजाना दृश्य डरावना लगता है, जिससे वे खेतों से दूर रहते हैं. इसी तरह, चोर भी खेत में घुसने से कतराते हैं.

सस्ता और प्रभावी उपाय: न तो कोई अतिरिक्त खर्च और न ही कोई खास रखरखाव की जरूरत. एक बार कफन बांध दिया तो हफ्तों तक यह अपना काम करता रहता है.

गांव में तेजी से बढ़ रहा है चलन

यह तकनीक जौनपुर के किसानों के बीच लोकप्रिय हो गई है. अब कई गांवों में किसानों ने अपने खेतों के किनारे सफेद कपड़े बांधना शुरू कर दिए हैं.  कुछ किसान तो पुराने कपड़ों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. खेतों में नीलगाय आकर पूरी फसल चौपट कर देती थी. अब जबसे हमने यह तरीका अपनाया है, नुकसान में कमी आई है.

क्या यह स्थायी समाधान है?

यह तरीका अस्थायी रूप से प्रभावी हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक यह टिकाऊ समाधान नहीं है. जानवर धीरे-धीरे इसके अभ्यस्त हो सकते हैं. इसलिए किसानों को अन्य टिकाऊ और वैज्ञानिक तरीकों पर भी विचार करना चाहिए, जैसे सौर ऊर्जा से चलने वाले सायरन, कांटेदार तार, जैविक विकर्षक आदि.

जौनपुर के किसानों द्वारा अपनाया गया यह तरीका भले ही अस्थायी हो, लेकिन उनकी रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता को दर्शाता है. यह दर्शाता है कि जब संसाधनों की कमी होती है, तब भी लोग अपनी बुद्धिमानी से समाधान निकाल सकते हैं.  हालांकि, यह जरूरी है कि सरकार और विशेषज्ञ किसानों को बेहतर और दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध कराएं, जिससे उनकी मेहनत और फसल दोनों सुरक्षित रह सकें.

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