यूपी में है चूड़ियों वाली अलग दुनिया! दिन-रात एक कर तैयार होते हैं शानदार डिजाइन, कीमत सबसे कम

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यूपी में है चूड़ियों वाली अलग दुनिया! दिन-रात एक कर तैयार होते हैं शानदार डिजाइन, कीमत सबसे कम


Agency:News18 Uttar Pradesh

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Bangles Making Process: हाथों में पहनने के लिए मार्केट में मिलने वाली चूड़ियों को बहुत मेहनत से तैयार किया जाता है. मजदूरों को दिन-रात की मेहनत करनी पड़ती है.

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गांव में चूड़ियां तैयार करती महिलाएं

हाइलाइट्स

  • फिरोजाबाद में चूड़ियों का निर्माण दिन-रात होता है.
  • महिलाएं घर के काम के बाद चूड़ियां बनाती हैं.
  • एक बेलन चूड़ियों की मजदूरी 35 रुपए मिलती है.

Bangles Making Process: यूपी के फिरोजाबाद शहर को सुहाग नगरी के नाम से विश्वभर में जाना जाता है. यहां के लोग महिलाओं की सूनी कलाइयों को अपनी कारीगरी से खनका देते हैं. शहर से लेकर गांव तक महिलाएं भी इन कांच की चूड़ियों को तैयार करती हैं. इन चूड़ियों को सजाने के लिए कारीगरों को काफी मेहनत करनी पड़ती है.गांव में घर के काम करने के बाद महिलाएं और अन्य लोग इस काम को करना शुरु कर देते हैं, जिससे उनकी अच्छी इनकम भी हो जाती है. सुबह होते ही गांव के लोग इस काम को करना शुरू कर देते हैं.

मार्केट से कच्चा माल लाकर तैयार करते हैं चूड़ियां
फिरोजाबाद के गांव पहाड़पुर में रहने वाले चूड़ी कारीगर जलहरि ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि कांच की चूड़ियों को तैयार करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. कांच की चूड़ियों को सजाने से पहले बाजार से कारखानों से तैयार होने वाले कच्चे माल को लाया जाता है. इसके बाद इसे गोदामों में भेजा जाता है.

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वहां से गांव के कारीगर कच्चा माल तैयार करने के लिए गांव लेकर आते हैं. यहां सबसे पहले चूड़ियों की छटाई होती है. फिर उसके बाद एक बेलन में लगभग 32 चूड़ियों को लगाया जाता है.बेलन पर लगी चूड़ियों पर अलग अलग कलर के केमिकल को तैयार कर लगाया जाता हैं. इसके बाद गांव के लोग एक जगह बैठकर इन चूड़ियों पर विभिन्न तरह की डिजाइन तैयार करते हैं.इन चूड़ियों के एक बेलन को तैयार करने के लिए लगभग 1 घंटे का समय लग जाता है.

35 रुपए प्रति बेलन की मिलती है मजदूरी
गांव में सुबह से ही चूड़ियां तैयार करने का काम शुरू हो जाता है.महिलाएं घर के कामों से फ्री होने बाद चूड़ी के बेलन लगाने के लिए लग जाती हैं. एक बेलन में लगभग 35 चूड़ियां होती हैं और एक बेलन की कीमत भी 35 रुपए है. रोजाना गांव में लोग 10 बेलन तक लगा लेते हैं, जिससे उनकी अच्छी इनकम हो जाती है.

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