ये कठिन काम होगा आसान, एएमयू के प्रोफेसरों ने बना दी गजब मशीन
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Aligarh Muslim University: किसानी से जुड़े काम में कई काम काफी मेहनत वाले होते हैं. उन्हीं में से एक है फल और सब्जियों की तुड़ाई. अगर इसका बढ़िया समाधान मिल जाए तो…
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने किसानों के लिए बनाया रोबोट
अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के कृषि विभाग के प्रोफेसर ने किसानों को राहत देने वाला अविष्कार किया है. उन्होंने एक ऐसी रोबोटिक मशीन तैयार की है जो किसानों के खेत से फल और सब्जियों को तोड़ने का काम करेगा. इससे किसानों को काफ़ी मदद मिलेगी.
आपको बता दें कि फल और सब्जियों को तोड़ने के बाद एडवांस ड्रायर के जरिए इसे सुखाया जाएगा जिससे कि फल और सब्जियां सड़ें नहीं. प्रोफेसर का मानना है कि यह दोनों अविष्कार देश के किसानों के लिए वरदान साबित होंगे और लोग देश-विदेश में इस तकनीकि का इस्तेमाल कर सुरक्षित खेती कर सकेंगे.
अविष्कार को प्रोफेसर ने कराया पेटेंट
एएमयू के कृषि विभाग के पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. फैजान अहमद ने यह आधुनिक अविष्कार किया है. उन्होंने बताया कि इस समय कृषि कार्य के लिए मैन पावर की भारी कमी होती जा रही है. आने वाले सालों में इस काम में मैन पॉवर की और कमी आएगी. ऐसे में उनका अविष्कार किसानों के लिए वरदान साबित होगा. उनका तैयार किया गया यह रोबोट किसानों के सभी काम करेगा. उन्होंने बताया कि उनकी डिजाइन को बीते नवंबर 2024 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन से पेटेंट भी मिल चुका है.
मैनुअल ड्रायर से सूखते हैं फल-सब्जी
प्रोफेसर फैजान अहमद ने बताया कि उनका रोबोट चीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकता है. ऑटोमैटिक ड्रायर बेहतर तरीके से फलों की नमी को सोख लेता है. रोबोट खेतों से जब फल और सब्जी लाएगा तो इसे पूरी तरह से सुखाने के बाद ही रखा जाएगा. इसके लिए ऑटोमैटिक ड्रायर बनाया गया है.
उन्होंने बताया कि अभी तक भारत में ड्रायर का मैनुअल रूप ही मौजूद है जिसमें फल, फसल और सब्जियों को सुखाने में काफी समय लग जाता है. अब ऑटोमैटिक ड्रायर होने से समय की बचत होगी. प्रोफेसर फैजान अहमद ने बताया कि अभी उन्होंने ऑटोमैटिक ड्रायर का छोटा रूप तैयार किया है. बड़ी कंपनी और फर्म की जरूरत के अनुसार वह आने वाले दिनों में इसका बड़ा रूप भी तैयार करेंगे क्योंकि इसकी डिजाइन का पेटेंट उनके पास है.
उन्होंने कहा कि अगर किसी कृषि कंपनी या इंडस्ट्री को उनके डिजाइन या तकनीक का इस्तेमाल करना है या उन्हें इसकी जरूरत होगी तो इसके लिए उन्हें उनके साथ एमओयू साइन करना होगा. एमओयू होने के बाद यह टेक्नोलॉजी कंपनी को स्थानांतरित कर दी जाएगी. अभी इसकी कीमत तय नहीं की गई है. जल्द ही कीमत तय की जाएगी.