ये नई गन्ना किस्में बन गईं चीनी मिलों की पहली पसंद, जानें क्यों
Last Updated:
नवम्बर महीने में किसान शरदकालीन गन्ने की बुवाई में जुट गए हैं. इस समय किसान शीघ्र पकने वाली किस्मों का चयन करें, ताकि कम समय में अच्छी उपज मिल सके. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक के अनुसार, उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का चयन करना किसानों के लिए लाभदायक रहेगा. सही किस्म और बेहतर प्रबंधन से गन्ना खेती अधिक मुनाफेदार साबित हो सकती है.
शरदकालीन गन्ने की बुवाई का समय शुरू हो गया है. इस समय सही किस्म का चयन किसानों के लिए ज्यादा लाभदायक होगा. शीघ्र पकने वाली किस्में कम समय में अधिक उपज देती हैं, जिससे किसानों को जल्दी और अच्छी आमदनी मिलती है. बुवाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी और उन्नत किस्म का चुनाव ही बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करता है.

को.शा. 08272 एक शीघ्र पकने वाली खास किस्म है, जिसे ठंड के मौसम में बोया जा सकता है. इसका गन्ना सीधा, लंबा, मोटा और ठोस होता है. यह गुड़ बनाने के लिए उत्तम है और इसमें लगभग 13.27% फाइबर पाया जाता है. यह किस्म पेड़ी की फसल भी अच्छी देती है और इसकी छिलाई करना आसान है. उत्पादन 105 से 107 टन प्रति हेक्टेयर तक होता है.

को.शा. 13231 एक बेहतर चीनी परता देने वाली किस्म है, जिससे चीनी मिलों को लाभ होता है. इसकी पोरियां गोलाकार और मध्यम लंबी होती हैं और यह गुड़ बनाने के लिए भी अच्छी है. इसमें 13.76% फाइबर पाया जाता है. यह किस्म 91 से 92 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है. इसकी सूखी पत्तियां आसानी से छूट जाती हैं, जिससे छिलाई करना आसान हो जाता है.

को.शा. 13235 एक नई किस्म है, जो अच्छा चीनी परता देती है और तेजी से बढ़ती है. इसकी बंधाई करना आवश्यक है. इस गन्ने की सबसे खास बात यह है कि इसकी सूखी पत्तियां आसानी से उतर जाती हैं, जिससे छिलाई बेहद आसान हो जाती है. यह किस्म 81 से 92 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है.

को.शा. 17231 एक शीघ्र पकने वाली और अधिक चीनी परता देने वाली किस्म है, जो चीनी मिलों में काफी लोकप्रिय है. इसका गन्ना सीधा, मध्यम मोटा और कड़ा होता है. इसकी छिलाई आसान है क्योंकि सूखी पत्तियां आसानी से उतर जाती हैं. यह किस्म एक हेक्टेयर में 83 टन तक उत्पादन देती है और लाल सड़न रोग के प्रति मध्य रोगरोधी है.

को.शा. 18231 को इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में सामान्य खेती के लिए स्वीकृत किया गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह नई किस्म किसानों को 90 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक उत्पादन देगी और इसमें चीनी परता भी अधिक होगा. इसकी छिलाई करना आसान है और यह लाल सड़न रोग के प्रति मध्य रोगरोधी भी है.