योगी ने ज‍िसे बताया पहलवान, उस अफसर ने मुसलमानों को फ‍िर दी नसीहत, क‍ितना जायज?

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योगी ने ज‍िसे बताया पहलवान, उस अफसर ने मुसलमानों को फ‍िर दी नसीहत, क‍ितना जायज?


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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभल के सीओ अनुज चौधरी को उनके बयाने के ल‍िए तारीफ की थी. लेकिन अब यही अनुज चौधरी अपने बयानों की वजह से सवालों के घेरे में आ गए हैं.

संभल सीओ अनुज चौधरी इन द‍िनों अपने बेबाक बयानों की वजह से चर्चा में हैं.

हाइलाइट्स

  • अनुज चौधरी के बयान पर विवाद छिड़ा.
  • योगी आदित्यनाथ ने अनुज चौधरी का बचाव किया.
  • सोशल मीडिया पर बयान को लेकर बहस जारी.

संभल के सीओ अनुज चौधरी के 40 जुमा वाले बयान पर बवाल मचा तो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका बचाव करते हुए कहा, मेरा वह अफसर पहलवान रहा है. उसने कोई गलत बात नहीं की. लेकिन अपने बेबाक अंदाज और विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहने वाले इसी अनुज चौधरी ने एक बार फ‍िर मुसलमानों को नसीहत दी है. उन्‍होंने कहा, अगर आपको सेवईं खिलानी है, तो पहले गुजिया खानी पड़ेगी. इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहा है कि क्या यह बयान जायज है या फिर यह सिर्फ एक और विवाद को जन्म देने वाला कदम है?

हुआ यूं कि संभल में विभिन्न समुदायों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने की बात चल रही थी. इसी बीच, अनुज चौधरी से यह टिप्पणी की. उनका कहना था कि अगर समाज में आपसी भाईचारा बनाना है, तो एक-दूसरे की परंपराओं को समझना और अपनाना जरूरी है. “सेवईं ईद की मिठास का प्रतीक है, और गुजिया होली की खुशियों का. दोनों को अपनाए बिना एकता की बात अधूरी है. हालांकि, उनके इस बयान को कई लोगों ने अलग-अलग तरीके से लिया. कुछ ने इसे सांस्कृतिक एकता की मिसाल बताया, तो कुछ ने इसे मुस्लिम समुदाय पर थोपा गया नियम करार दिया.

सोशल मीडिया में क्‍या बात
अनुज चौधरी का यह बयान पलभर में ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. एक यूजर ने लिखा, “यह एकता की बात नहीं, बल्कि अपनी शर्तें मनवाने की कोशिश है. क्या वे यह कहना चाहते हैं कि मुस्लिम अपनी पहचान छोड़ दें?” वहीं, एक अन्य यूजर ने समर्थन में लिखा, चौधरी साहब ने सही कहा. अगर हम सब एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होंगे, तो समाज में प्यार और भाईचारा बढ़ेगा.”

कितना जायज है यह बयान?
अनुज चौधरी का यह बयान कई सवाल खड़े करता है. क्या सांस्कृतिक एकता के नाम पर किसी समुदाय से यह अपेक्षा करना उचित है कि वे अपनी परंपराओं से पहले दूसरों की परंपराओं को अपनाएं? या फिर यह एक प्रतीकात्मक संदेश था, जिसे गलत समझा गया? जानकारों का मानना है कि ऐसे बयानों को संदर्भ के साथ देखना जरूरी है. कुछ लोगों ने कहा, अनुज चौधरी का इरादा शायद गलत न हो, लेकिन उनके शब्दों का चयन ऐसा था कि विवाद होना तय था.

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