राजेंद्र-1 से स्वर्ण रेखा तक…परवल की ये टॉप वैरायटी, क्या है 9:1 वाला फॉर्मूला, जानें

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राजेंद्र-1 से स्वर्ण रेखा तक…परवल की ये टॉप वैरायटी, क्या है 9:1 वाला फॉर्मूला, जानें


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राजेंद्र-1 से स्वर्ण रेखा तक…परवल की ये टॉप वैरायटी, जानें 9:1 वाला फॉर्मूला

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Parwal Cultivation Tips : परवल की खेती गर्मियां के लिए बेस्ट हैं. तापमान बढ़ने के साथ परवल की बेलें तेजी से ग्रोथ करती हैं. जल निकासी वाली, जीवांशयुक्त बलुई या उपजाऊ दोमट मिट्टी इसे उगाने के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. सबसे जरूरी बात परवल में नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर आते हैं, इसलिए बेहतर परागण और अधिक उत्पादन के लिए 9 मादा पौधों के साथ 1 नर पौधा लगाना जरूरी है. पौधों की बढ़वार के लिए 20 से 25 दिन बाद 20 किलो यूरिया और तीन महीने बाद पोटाश दें.

बलिया. परवल की खेती किसानों की किस्मत बदल सकती हैं. गर्मियां इसे उगाने के लिए बेस्ट हैं. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, परवल की बेलें तेजी से ग्रोथ करती हैं और समय पर फूल व फल देने लगती हैं. बस इसी के चलते किसान इस समय खेत की तैयारी से लेकर रोपाई तक के काम में तेजी लाते हैं. परवल की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले खेत का सही चयन जरूरी है कि आखिर खेत इसके योग्य है या नहीं. 35 साल अनुभवी श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन के प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश सिंह के अनुसार, जल निकासी वाली, जीवांशयुक्त बलुई या उपजाऊ दोमट मिट्टी इस फसल के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है.

वे बताते हैं कि खेत की गहरी जुताई 2 से 3 बार करके मिट्टी को भुरभुरी बनानी चाहिए. उसमें लगभग 5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद अच्छी तरह मिलाना बेहतरीन उपाय है. लगभग 70KG डीएपी भी डालने से पौधों को शुरुआती पोषण मिल जाते हैं.

कतार से कतार कितनी दूरी

सबसे जरूरी बात यह है कि परवल में नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर आते हैं, इसलिए बेहतर परागण और अधिक उत्पादन के लिए 9 मादा पौधों के साथ 1 नर पौधा लगाना जरूरी माना जाता है. यही संतुलन खेत में फल बनने की प्रक्रिया को तेज कर बंपर पैदावार देने में अहम भूमिका निभाता हैं. परवल की खेती बीज से नहीं, बल्कि जड़ों के कंद या बेल की लच्छियों से की जाती है. रोपाई के लिए लगभग 2 मीटर लंबी और चौड़ी बेल पर्याप्त होता है. एक एकड़ खेत में करीब 3500 से 4000 पौधों की जरूरत होती है. रोपाई के समय खेत में नालियां बनाकर कतार से कतार की दूरी लगभग 2 मीटर और पौध से पौध की दूरी लमसम 1 मीटर रखनी चाहिए.

कितने दिन में सिंचाई

रोपण के तुरंत बाद पहली सिंचाई कर और बाद में मौसम के अनुसार, 10 से 15 दिन के अंतर पर पानी दिया जा सकता है. पौधों की बढ़वार के लिए 20 से 25 दिन बाद लगभग 20 किलोग्राम यूरिया और तीन महीने बाद पोटाश दें. बेलों को ऊपर चढ़ाने के लिए मचान या बांस का सहारा दिया जाता है, जिससे फल साफ और स्वस्थ बनते हैं. हालांकि, परवल की खेती के लिए मचान विधि बहुत उपयोगी हैं. फल मक्खी जैसे कीटों से बचाव के लिए हर 15 दिन में कीटनाशक का छिड़काव भी जरूरी होता है. किसानों के बीच राजेंद्र-1, राजेंद्र-2 और स्वर्ण रेखा जैसी उन्नत किस्में काफी लोकप्रिय हैं. सही देखभाल और उपयुक्त मिट्टी मिलने पर एक एकड़ में लगभग 50 से 60 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है.

यहां खूब फल-फूल रही

प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा और घाघरा नदी के आसपास के क्षेत्रों में परवल की खेती खासतौर पर खूब फल-फूल रही है. यहां से परवल अन्य प्रदेशों में भी भेजा जाता है. बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सब्जी के साथ-साथ इसका अचार और मिठाइयों में भी इस्तेमाल हो रहा है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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