रात 12 से 3 बजे के बीच क्यों बढ़ जाती हैं जिन्नात और शैतान की हरकतें? मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताई वजह
अलीगढ़: अक्सर रहस्यमय घटनाओं और रूहानी दुनिया से जुड़े किस्से हमेशा लोगों को अपनी तरफ खींचते रहे हैं. खासकर आधी रात के बाद का वक्त, जिसके बारे में अक्सर कहा जाता है कि यह जिन्नात, शैतान और असरात के ज्यादा एक्टिव होने का समय होता है. ऐसा कहा जाता है कि आधी रात के वक्त अदृश्य ताकतें अधिक सक्रिय हो जाती हैं. इस्लाम धर्म में भी आधी रात के इस हिस्से के बारे में कई खास बातें बताई गई हैं.
क्यों यह वक्त खतरनाक माना जाता है? कौन-सी ताकतें हरकत में आती हैं और इंसान खुद को कैसे महफूज रख सकता है? इसी पूरी हकीकत को जानने के लिए लोकल 18 की टीम ने मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन से खास बात चीत की.
रात का अंतिम हिस्सा गहरा और असरात वाला
मौलाना इफराहीम हुसैन के अनुसार, इस्लामिक मान्यताओं में रात को तीन हिस्सों में बांटा गया है. इनमें रात 12 बजे से 3 बजे तक का समय, अंतिम और सबसे गहरा हिस्सा माना जाता है. उनका कहना है कि इस दौरान अंधेरा और सन्नाटा ज्यादा होने की वजह से जिन्नात, शैतान और ग़ैबी ताकतों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, यह धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है.
बढ़ सकती है नकारात्मक विचार, डर, या गलत फैसलों की प्रवृत्ति
मौलाना के अनुसार, घने अंधेरे और शांति के माहौल में इंसान के भीतर नकारात्मक विचार, डर, या गलत फैसलों की प्रवृत्ति बढ़ सकती है. धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि चोरी, नुकसान पहुंचाना या गलत काम करने की प्रवृत्ति भी अक्सर इसी समय बढ़ती है.
ये समय रहमत और इबादत का
हालांकि, मौलाना बताते हैं कि यही समय सबसे अफजल भी माना जाता है. इस्लाम में इसे दुआओं की कुबूलियत और तहज्जुद की नमाज का वक्त कहा गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग इस दौरान इबादत करते हैं, उन्हें विशेष सवाब और बरकत मिलती है.
कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
मौलाना इफराहीम हुसैन के अनुसार, धार्मिक शिक्षाओं में इस समय के नकारात्मक असरात से बचने के लिए कुछ आसान तरीके बताए गए हैं:
– पाक होकर (वज़ू के साथ) सोना
– अल्लाह का नाम लेकर सोना
– तहज्जुद की नमाज़ अदा करना
वे मानते हैं कि ऐसा करने से इंसान नकारात्मक विचारों और डर से दूर रह सकता है.