राधारानी के ननिहाल में छाया होली का खुमार, भक्ति में डूबे भक्त!

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राधारानी के ननिहाल में छाया होली का खुमार, भक्ति में डूबे भक्त!


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ब्रज में होली का विशेष महत्व है. मुखराई में राधारानी की ननिहाल में चरकुला नृत्य और बाजनी शिला प्रसिद्ध हैं. 15 मार्च को चरकुला नृत्य का आयोजन होगा.

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ब्रज में होली की धूम.

हाइलाइट्स

  • ब्रज में होली का विशेष महत्व है.
  • 15 मार्च को चरकुला नृत्य का आयोजन होगा.
  • मुखराई में राधारानी की ननिहाल में भक्ति में डूबे भक्त.

मथुरा: ब्रज में होली का हर स्थान पर एक अलग महत्व है. राधारानी के धाम, बरसाना में लड्डू और लट्ठमार होली प्रसिद्ध है, वहीं राधारानी के ननिहाल में होने वाला चरकुला नृत्य विश्व प्रसिद्ध है. होली समाज गायन पर नृत्य करतीं महिलाओं की तस्वीरें राधारानी के ननिहाल, मुखराई से जुड़ी हुई हैं, जहां बसंत पंचमी से निरंतर होली समाज गायन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

ब्रज में होली का स्थान विशेष महत्व
होलिका दहन के दूसरे दिन दौज को राधारानी के ननिहाल, मुखराई में विश्व प्रसिद्ध चरकुला नृत्य का आयोजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में राधारानी के जन्म की खुशी में राधारानी की नानी, मुखरा देवी ने 108 दीपकों के साथ चक्र रूपी चरकुला को सिर पर रखकर रथ के पहिये पर चढ़कर नृत्य किया था. तभी से यह परंपरा चली आ रही है. इस वर्ष चरकुला नृत्य का आयोजन 15 मार्च को होगा. मुखरादेवी मंदिर में समाज गायन के साथ चरकुला नृत्य की तैयारियां चल रही हैं.

मुखराई में राधारानी का बचपन
मुखराई में स्थित पत्थर की शिला से निकलने वाली अलग-अलग आवाजों के बारे में बताया जाता है कि यह वही शिला है, जिस पर खेलते हुए राधारानी अपनी नानी, मुखरा देवी के घर आईं थीं. यह शिला ‘बाजनी शिला’ के नाम से जानी जाती है, और इससे कांसे की तरह अलग-अलग आवाजें निकलती हैं. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस शिला को दिल्ली के संग्रहालय में रखा था, लेकिन ब्रजवासियों के आग्रह पर इसे छह माह बाद वापस मुखराई भेज दिया गया. आज भी यह शिला वहां विराजमान है, और इसे देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं.

राधारानी के दर्शन से मिलती है मुक्ति
राधारानी के ननिहाल में आने वाले सभी भक्त होली के रंगों में रंगकर भजन कीर्तन करते हैं और होली की रसियाओं पर जमकर थिरकते हैं. यहां आने वाले दर्शनार्थियों का कहना है कि ब्रज में होली का अनुभव बिल्कुल अलग होता है. यहां की होली का उल्लास और रंग दुनियाभर में प्रसिद्ध है, और देश के कोने-कोने से लोग यहां आकर इसका हिस्सा बनते हैं. भक्तों का मानना है कि जो भी यहां राधारानी या श्री कृष्ण के दर्शन करता है और होली का आनंद लेता है, वह किसी भी प्रकार की पीड़ा से मुक्त हो जाता है और उसके जीवन में निरंतर वृद्धि होती है.

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