रामनगर में भूख से तड़प रहे घायल हाथी को क्यों नहीं मिली मदद? पीलीभीत के एक्सपर्ट ने बताया कहां फंसा पेच?

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रामनगर में भूख से तड़प रहे घायल हाथी को क्यों नहीं मिली मदद? पीलीभीत के एक्सपर्ट ने बताया कहां फंसा पेच?


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Pilibhit News : उत्तराखंड के रामनगर से एक हाथी का वीडियो वायरल हो रहा है. हाथी किसी गाड़ी या ट्रेन से टक्कर के कारण घायल हुआ है. हाथी की हालत देखने वन विभाग की टीम भी आई लेकिन हाथी को रेस्क्यू नहीं किया गया. आइए…और पढ़ें

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घायल हाथी

हाइलाइट्स

  • रामनगर में घायल हाथी को अनुमति के अभाव में नहीं मिली मदद.
  • वन्यजीवों की मदद के लिए विशेषज्ञों और अनुमति की आवश्यकता होती है.
  • हाथी की मदद न मिलने से लोगों की समस्याएं बढ़ सकती हैं.

पीलीभीत. कई बार हमें अपने घरों के आसपास जीव-जंतु घायल अवस्था या फिर तकलीफ में नजर आते हैं. पालतू पशुओं की मदद तो लोग खुद के प्रयासों से ही कर लेते हैं लेकिन जंगली जानवरों के मामले में परिस्थितियां बदल जाती हैं. कुछ जंगली जानवरों के बीमार या फिर घायल होने के मामले में अनुभवी विशेषज्ञों व शासन से अनुमति की आवश्यकता भी होती है. हाल ही में उत्तराखंड के रामनगर से एक मामला सामने आया है जिसमें एक हाथी कई दिन से मदद की आस में है लेकिन वन महकमा अनुमति के अभाव में अपने हाथ पीछे खींच रहा है. अगर आप भी अपने आसपास किसी वन्यजीव को तकलीफ में देखते हैं तो ऐसे मामलों में उनकी मदद कैसे करनी है इसका प्रोसेस हम आपको बताएंगे.

इंसानियत हम इंसानों का सबसे अहम गुण माना जाता है. बड़े बुजुर्गों द्वारा दी गई इंसानियत की परिभाषा में दूसरों के प्रति दया व मदद के भाव समाज के लिए आवश्यक बताया गया है. नतीजतन अधिकांश लोग ऐसे होते हैं जो किसी को भी तकलीफ में देख कर उसकी मदद में जुट जाते हैं. वहीं बेजुबानों के मामले में तो लोग और तत्पर रहते हैं. पालतू या फिर सामान्य जानवर की मदद के लिए तो लोग खुद या फिर किसी संस्था का सहारा ले लेते हैं. लेकिन वन्यजीवों के घायल व आपातकालीन परिस्थिति में फंसने पर मामला पेचीदा हो जाता है. वहीं अगर बात बाघ, तेदुआ या फिर किसी अन्य बड़े वन्यजीव की हो तो इन्हें रेस्क्यू करने से लेकर इनके इलाज के लिए विशेष व अनुभवी पशु चिकित्सकों के साथ ही साथ कागजी कार्रवाई की आवश्कता होती है.

ट्रेंक्युलाइज करने से पहले लेनी होती है अनुमति
लोकल 18 से बातचीत में वरिष्ठ वनजीवन पत्रकार केशव अग्रवाल बताते हैं कि चूंकि वन्यजीव हमारी प्रकृति का अहम हिस्सा होने के साथ ही साथ आवश्यक भी हैं. ऐसे में उनके संरक्षण के लिहाज से बनाए गए अधिनियम के तहत उन्हें अलग अलग अनुसूचियों में रखा गया है. शेड्यूल 01 में रखे गए किसी भी वन्यजीव को ट्रेंक्युलाइज कर रेस्क्यू करने के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की अनुमति की आवश्यकता होती है. मामलों की गंभीरता व परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमति जारी की जाती है.

हाथी के साथ बढ़ सकती है लोगों की समस्या
केशव अग्रवाल बताते हैं कि रामनगर में हाथी को लेकर विभाग की ओर से अनुमति न मिलना हाथी के साथ ही साथ आसापास रहने वाले लोगों के लिए भी समस्या बनकर उभर सकता है. लोगों को चाहिए कि किसी भी वन्यजीव के घायल या फिर रिहाइश में पहुंचने की स्थिति में सबसे पहले वन विभाग को सूचित करें.

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रामनगर में भूख से तड़प रहे घायल हाथी को क्यों नहीं मिली मदद?



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