वी आर सरप्राइज्ड… KGMU में नहीं मिला बेड, तो हाईकोर्ट ने दिया आदेश
Last Updated:
केजीएमयू में इलाज ना मिलने पर महिला की मौत के बाद पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजधानी के प्रमुख चिकित्सा संस्थान से इमरजेंसी में मरीज को लौटाया जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर हालात को दर्शाता है. इस मामले से हम भी स्तब्ध हैं.
केजीएमयू अस्पताल.
लखनऊः केजीएमयू में इलाज ना मिलने पर महिला की मौत के बाद पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राजधानी के प्रमुख चिकित्सा संस्थान से इमरजेंसी में मरीज को लौटाया जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर हालात को दर्शाता है. इस मामले से हम भी स्तब्ध हैं. हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने मामले में मुख्य सचिव को रिपोर्ट देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट की बेंच ने यह आदेश बहराइच जिले की उर्मिला की याचिका पर जारी किया है. महिला की मौत से संबंधित आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को ये जानकारी मिली. जानकारी मिलने पर हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है.
गंभीर हालत में लाई गई महिला को नहीं मिला इलाज
दरअसल, बेड खाली न होने की बात कहकर केजीएमयू ने महिला को लौटा दिया था, जिसके बाद महिला को उचित इलाज नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई. याचिका में बेटी की दहेज हत्या का आरोप उसके ससुराल वालों पर लगाते हुए एफआईआर की मांग की गई है. याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़ित महिला को रात करीब 2:33 पर गंभीर अवस्था में केजीएमयू लाया गया था. केजीएमयू की प्रारंभिक राय में रात 10 बजे पीड़िता के चूहे मारने की दवा के संभावित सेवन का जिक्र किया गया. हालांकि केजीएमयू में उसे भर्ती नहीं किया गया.
‘यह अत्यंत चिंताजनक है’
“रिग्रेट,नो बेड अवेलेबल, रेफर टू बलरामपुर/आरएमएल” लिखकर वापस भेज दिया गया. हाईकोर्ट ने कहा कि केजीएमयू प्रदेश की राजधानी में स्थित राज्य का प्रमुख मेडिकल कॉलेज है. आधी रात आपात उपचार के लिए लाई गई मरीज को बेड उपलब्ध न होने के आधार पर लौटाया जाना अत्यंत चिंताजनक है. इसके बाद परिजन बेड की तलाश में इधर-उधर भटकते रहे और शाम 6:30 पर इलाज के अभाव में महिला की मौत हो गई.
‘आदेश की एक कॉपी मुख्य सचिव के सामने रखें’
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि आदेश की एक कॉपी मुख्य सचिव के सामने रखी जाए ताकि मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने, अस्पतालों में बेड की उपलब्धता के संबंध में उचित कार्रवाई की जा सके. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगली सुनवाई पर दोनों मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें मुख्य सचिव. मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी.
About the Author
प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें