शादीशुदा को किसी दूसरे के साथ रहने की कानूनी अनुमति नहीं..हाईकोर्ट का अहम फैसल

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शादीशुदा को किसी दूसरे के साथ रहने की कानूनी अनुमति नहीं..हाईकोर्ट का अहम फैसल


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Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव इन रिलेशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा होते हुए भी किसी दूसरे के साथ लिव इन रिलेशन में रहने की कानूनी अनुमति नहीं दी जा सकती. हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ याची की सुरक्षा देने की मांग को ख़ारिज कर दिया.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट का लिव इन रिलेशन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि विवाह या लिव-इन रिलेशनशिप के लिए दो वयस्क इंसानों की रजामंदी जरूरी है. किसी को भी ऐसे दो वयस्कों की निजी स्वतंत्रता में दखल देने का हक नहीं है, लेकिन यह स्वतंत्रता पूर्ण या असीमित नहीं है, कुछ प्रतिबंधों के साथ है. कोर्ट ने कहा एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक है, जहां दूसरे का कानूनी अधिकार शुरू होता है. एक व्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरे व्यक्ति के कानूनी अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकती. कोर्ट ने कहा विवाहित जीवन साथी के जीवित रहते या उससे तलाक लिए बगैर, किसी को भी तीसरे व्यक्ति के साथ विवाह करने या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की कानूनी अनुमति नहीं दी जा सकती।

याची शांति देवी व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया. कोर्ट ने कहा याची को अपनी सुरक्षा के लिए आदेश जारी करने की मांग करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि शादीशुदा को दूसरे के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की कानूनी अनुमति नहीं है. कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती, जो लिव-इन रिलेशनशिप में होने का दावा करते हैं. ऐसा न तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया जा सकता है.

सुरक्षा के लिए पुलिस के पास जा सकते हैं

फिर भी कोर्ट ने कहा यदि याचिकाकर्ताओं को कोई परेशान करता है या उनके साथ किसी प्रकार की हिंसा की जाती है, तो वे एक आवेदन देकर संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं. यह अपेक्षा की जाती है कि ऐसे आवेदन मिलने पर, संबंधित प्राधिकारी उसकी जांच करेगा और याचिकाकर्ताओं के जीवन तथा शरीर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विधि अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेगा. याचिका में याचियों ने अपने शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में किसी के हस्तक्षेप करने पर रोक लगाने और पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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