शुद्धता और सेहत का संगम! पंचामृत के बिना अधूरी है हर पूजा, जानिए इसके चमत्कारी फायदे

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शुद्धता और सेहत का संगम! पंचामृत के बिना अधूरी है हर पूजा, जानिए इसके चमत्कारी फायदे


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Benefits of Panchamrit: दूध, दही, घी, शहद और शक्कर या गुड़ से बने पवित्र मिश्रण को ही पंचामृत कहा जाता है. पंचामृत यानी पांच अमृतों का संगम, जो शरीर, मन और आत्मा तीनों के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है. न केवल यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है, बल्कि इसके बिन हर पूजा पाठ अधूरा माना जाता है. आगे जानिए…

पंचामृत बनाने के लिए घी 1 चम्मच, शहद 2 चम्मच, शक्कर 4 चम्मच, दही 8 चम्मच और दूध 16 चम्मच की जरूरत पड़ती है. सभी सामग्री शुद्ध और ताज़ी होनी चाहिए, ताकि स्वाद, शुद्धता और गुण दोनों बरकरार रहें.

बनाने की विधि

इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक साफ बर्तन में घी, शहद और शक्कर डालकर हल्के हाथ से मिलाए. इसके बाद दही मिलाकर उसे धीरे-धीरे मिक्स करें. अंत में कच्चा दूध डालकर अच्छे से घोल लें. यह पंचामृत न केवल पूजा के लिए, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

पाचन शक्ति में सुधार

हालांकि, लोग किसी और पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाने के लिए तमाम ड्राई फ्रूट से भी डालते हैं. लेकिन असली पंचामृत केवल दूध, दही घी शक्कर और मधु से ही बनता हैं, जो सदियों पुरानी परंपरा भी है. इस मिश्रण में गुड़ और दही का मेल पाचन को दुरुस्त रखता है. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और कब्ज व गैस आदि दूर होते हैं.

ऊर्जा, ताकत और...

पंचामृत में पड़ने वाले गुड़ और घी शरीर को तुरंत ऊर्जा देते हैं, वहीं दूध और दही शरीर को आवश्यक प्रोटीन और पोषक तत्व प्रदान करते हैं. इसमें विटामिन-ई, आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाकर शरीर को बीमारियों से बचाते हैं.

हड्डियों, त्वचा और मानसिक रोग

इसमें पड़ने वाले घी और दूध में कैल्शियम पाया जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है. यह मिश्रण त्वचा को निखारने, मुलायम बनाने और चमकदार रखने में सहायक होता है. साथ ही गुड़ और घी का सेवन तनाव घटाकर मन को शांति और अनिद्रा को दूर करता हैं.

उपयोग और विशेष महत्व

पंचामृत को धार्मिक अनुष्ठानों में पवित्र प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. स्वास्थ्यवर्धन के लिए इसे सुबह खाली पेट या रात में सोने से पहले लिया जा सकता है. चाहें तो इसमें तुलसी के पत्ते और गंगाजल मिलाकर इसे और पवित्र तथा औषधीय गुणों से भरपूर बनाया जा सकता है.

काफी महत्त्व

बलिया शहर निवासी बुजुर्ग डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय के अनुसार, पंचामृत एक बहुत शुद्ध प्रिया पदार्थ है, जो प्राचीन काल से सेवन किया जाता आ रहा है. अचार्य राजकुमार पंडित ने कहा कि, पंचामृत के बगैर हिंदू धर्म का हर छोटा बड़ा पूजा पाठ अधूरा माना जाता है.

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