शौर्य दिवस पर हनुमानगढ़ी से लेकर राम मंदिर के प्रवेश द्वार तक बांटे गए लड्डू
Last Updated:
Shaurya Diwas News: 6 दिसंबर 1992 को हुए ढांचे के विध्वंस की 33वीं बरसी पर राम भक्तों ने इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाया. राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार पर संतों ने मिष्ठान वितरण किया और जय श्रीराम के नारों के साथ उल्लास जताया. तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि आज शौर्य दिवस है. राम मंदिर के मुख्य द्वार पर मिठाई बांटकर हमने उत्साह मनाया.
अयोध्याः उत्तर प्रदेश के अयोध्या में शनिवार यानी कि 6 दिसंबर को शौर्य दिवस धूमधाम से मनाया गया. 6 दिसंबर को लेकर राम नगरी में कई धार्मिक अनुष्ठान हुए. हनुमानगढ़ी से लेकर राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक दीपोत्सव जैसा नज़ारा दिखा. अयोध्या में शौर्य दिवस के मौके पर हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि परिसर को दीपों से सजाया गया. हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर 5100 दीपक जलाए गए और पटाखे छोड़कर दीपावली जैसा उत्सव मनाया गया.
6 दिसंबर 1992 को हुए ढांचे के विध्वंस की 33वीं बरसी पर राम भक्तों ने इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाया. राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार पर संतों ने मिष्ठान वितरण किया और जय श्रीराम के नारों के साथ उल्लास जताया. तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि आज शौर्य दिवस है. राम मंदिर के मुख्य द्वार पर मिठाई बांटकर हमने उत्साह मनाया.
वहीं हनुमानगढ़ी के मुख्य द्वार पर प्रमुख संत राजू दास ने 5100 दीपक जलाकर उत्सव में सहभागिता की. संत राजू दास के शिष्यों ने भी मंदिर की मुख्य सीढ़ियों पर दीप प्रज्वलित किए और पटाखे छोड़े. हनुमानगढ़ी महंत राजू दास ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष और लाखों राम भक्तों की आहुति के बाद आज का दिन आया है. राम मंदिर के शिखर पर विजय ध्वज लहरा रहा है. आज हनुमानगढ़ी दीपों से जगमगा रही है. यह राम भक्तों के बलिदान का सुखद परिणाम है.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि हनुमानजी के चरणों और मंदिर की सीढ़ियों पर दीपक प्रज्वलित कर भक्तों ने आस्था और उत्साह का प्रदर्शन किया. शौर्य दिवस पर पूरी अयोध्या राम नाम के जयकारों और दीपमालाओं से जगमगाती दिखाई दी. अयोध्या में शौर्य दिवस का यह उत्सव राम भक्तों में विशेष जोश और आस्था का प्रतीक बना रहा. बता दें कि 6 दिसंबर को सूबे के अलग-अलग जिलों में पुलिस हाई अलर्ट पर थी. चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा था. यहां तक की पुलिस सोशल मीडिया पर भी नजर बनाई हुई थी.
About the Author
प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें