सरकारी नौकरी छोड़ी, मशरूम पकड़ा… 23 साल की अंशुल बना रहीं बिजनेस क्वीन!
Last Updated:
सहारनपुर की अंशुल पंवार ने 23 साल की उम्र में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. अपने पिता से सीखी कला के जरिए वे हर दिन कई क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं.
सहारनपुर की लड़की अंशुल पंवार मशरूम के क्षेत्र में बना रही एक अलग ही पहचान
अंकुर सैनी/सहारनपुर- सहारनपुर के गांव मदनुकी की 23 वर्षीय अंशुल पंवार न सिर्फ अपनी पढ़ाई कर रही हैं, बल्कि साथ में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल कर रही हैं. B.Com की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंशुल ने सरकारी नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार चुना और अपने पिता सतवीर पंवार से मशरूम उत्पादन का हुनर सीखा.
पिछड़े जिले को बना रही मशरूम हब
कभी सहारनपुर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ माना जाता था. लेकिन अब अंशुल जैसे युवाओं की बदौलत यहां का मशरूम हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल और उत्तराखंड की मंडियों तक पहुंच रहा है.
8,000 बैग से रोज निकलती है कई क्विंटल मशरूम
अंशुल ने अपनी जमीन में दो यूनिट तैयार कर रखी हैं, जिनमें करीब 8,000 बैग लगे हुए हैं. इनसे हर दिन दो से पांच क्विंटल मशरूम का उत्पादन होता है, जो विभिन्न मंडियों में भेजा जाता है.
सर्दियों में बटन, गर्मियों में ऑयस्टर मशरूम
अंशुल सर्दियों में बटन मशरूम और गर्मियों में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन करती हैं. बटन मशरूम की कीमत लगभग 150 रुपये प्रति किलो है और यह क्षेत्रीय मंडियों में धड़ल्ले से बिक रहा है.
बेटियों के लिए मिसाल बनीं अंशुल
अंशुल की सफलता ने आस-पास के गांवों के लोगों को भी प्रोत्साहित किया है. अब कई परिवार अपनी बेटियों को खेती और स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर रहे हैं.
पिता ने दी बराबरी की परवरिश
अंशुल बताती हैं कि उनके पिता ने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया और हमेशा उन्हें बराबर का मौका दिया. यही वजह है कि आज अंशुल दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं.
रोजगार के साथ कायम कर रही मिसाल
अपने व्यवसाय से अंशुल न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि आसपास के लोगों को भी रोजगार देने का काम कर रही हैं. वह चाहती हैं कि आज की बेटियां आत्मनिर्भर बनें और अपने पैरों पर खड़ी हों.
Saharanpur,Uttar Pradesh
March 18, 2025, 17:06 IST