सर्दियों में गाड़ी के अंदर सोना कितना खतरनाक? जानकर चौंक जाएंगे
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सर्दियों की ठंडी रातों में गाड़ी के अंदर सोना जितना आसान लगता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है. बंद केबिन में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस और ठंडी हवा मिलकर दम घुटने, बेहोशी और शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक गिरने का खतरा बढ़ा देती हैं. ऊपर से हीटर या इंजन में खराबी आग जैसी गंभीर घटना का कारण बन सकती है. ऐसे में सतर्क रहना जरूरी है और रात गाड़ी में बिताने के बजाय किसी सुरक्षित जगह पर आराम करना ही समझदारी है.
सर्दियों में ठंड से बचने के लिए कई लोग गाड़ी स्टार्ट कर हीटर ऑन करके अंदर ही सो जाते हैं, लेकिन यह आदत बेहद खतरनाक हो सकती है. गाड़ी से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बंद केबिन में भरने लगती है. यह गैस न दिखाई देती है और न ही इसकी कोई गंध होती है. नींद की अवस्था में इंसान को इसका अहसास भी नहीं होता और दम घुटने से जान जाने का खतरा बना रहता है. कई मामलों में सुबह तक व्यक्ति बेहोश या मृत पाया गया है, इसलिए सर्द रातों में गाड़ी के अंदर सोने से बचना बेहद जरूरी है.

सर्दी के मौसम में लोग गाड़ी के शीशे पूरी तरह बंद रखते हैं. अंदर सोते रहने पर ऑक्सीजन धीरे-धीरे कम होने लगती है. ताजी हवा न मिलने से दिमाग और शरीर पर बुरा असर पड़ता है. व्यक्ति को चक्कर, घबराहट और गहरी नींद जैसी स्थिति हो सकती है. कई मामलों में इंसान बेहोश हो जाता है और खुद को बचाने की स्थिति में नहीं रहता. यही वजह है कि सर्दियों में बंद गाड़ी के अंदर सोना एक बड़ा खतरा बन सकता है.

रात के समय सर्दियों में तापमान तेजी से गिरता है. अगर गाड़ी बंद हो जाए या हीटर काम करना बंद कर दे तो अंदर ठंड और बढ़ जाती है. सोते समय शरीर को ठंड का एहसास देर से होता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है. इस स्थिति में शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक गिर सकता है. इसके कारण सुस्ती, भ्रम और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं और कई बार व्यक्ति समय रहते मदद भी नहीं ले पाता. इसी वजह से ठंडी रात में गाड़ी के अंदर सोना जोखिम भरा माना जाता है.
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लंबे समय तक गाड़ी स्टार्ट रखकर सोने से इंजन और इलेक्ट्रिक सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. सर्दियों में वायरिंग और हीटर सिस्टम ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं. कई बार ओवरहीटिंग, शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी के कारण आग लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं. सोते समय व्यक्ति को समय रहते खतरे का अंदाजा नहीं लग पाता और छोटी सी तकनीकी खराबी बड़ा हादसा बन सकती है. इसलिए सर्द रातों में गाड़ी स्टार्ट रखकर सोना सुरक्षित नहीं माना जाता.

सर्दियों में गाड़ी के अंदर जमा ठंडी हवा और इंजन से निकलने वाली गैसें सांस के जरिए सीधे फेफड़ों तक पहुंच जाती हैं. लंबे समय तक ऐसी हवा में सोने से सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और खांसी की समस्या हो सकती है. दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए यह स्थिति और ज्यादा खतरनाक साबित होती है. ठंडी और प्रदूषित हवा फेफड़ों की कार्यक्षमता को कमजोर कर देती है. यही कारण है कि सर्दियों की रात में गाड़ी के अंदर सोना सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है.

गाड़ी में सोने से शरीर को पूरी और आरामदायक नींद नहीं मिल पाती. गलत पोजीशन, ठंड और असहज माहौल की वजह से नींद बार-बार टूटती रहती है. इसका असर अगली ड्राइविंग पर साफ नजर आता है. थकान और सुस्ती बढ़ जाती है, वहीं रिएक्शन टाइम भी कम हो जाता है. सर्दियों में पहले से ही कोहरा और कम विजिबिलिटी रहती है, ऐसे में नींद पूरी न होना सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ा देता है. सुरक्षित सफर के लिए सही जगह पर आराम करना जरूरी होता है.