सहारनपुर के पांच ऐसे शिवालय, जहां पांडवों ने छुपकर की थी पूजा, जानिए मान्यता
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सहारनपुर में पांडवों का गहरा नाता रहा है. यहां उन्होंने कई वर्षों तक तपस्या की और भगवान शिव की आराधना की, जिनके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं. अगर आप इस शिवरात्रि पर भगवान शिव के दर्शन करना चाहते हैं, तो हम आपको ऐसे पांच शिवालयों के बारे में बताएंगे, जहां खुद पांडवों ने भगवान शिव की पूजा की और आज भी वहां साक्षात भगवान शिव के दर्शन होते हैं.
सहारनपुर शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर कस्बा सरसावा स्थित महाभारत कालीन सिद्धपीठ श्री बनखंडी महादेव मंदिर सनातन धर्म के अनुयायियों की गहरी आस्था का केंद्र है. उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु यहां आकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. पांडवों के अज्ञातवास के समय सहदेव ने इस जंगल में रुककर भगवान शिव की आराधना की थी और जंगल के बीच जमीन से स्वयंभू शिवलिंग स्थापित हुआ था. यहां दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संतान प्राप्ति की इच्छाएं आज भी पूर्ण होती हैं. यही कारण है कि शिवरात्रि पर इस शिवालय में भक्तों की लंबी कतार लगती है.

सहारनपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर गंगोह विधानसभा क्षेत्र के गांव बरसी में भगवान शिव का अनोखा महाभारतकालीन शिव मंदिर मौजूद है, जो लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है. इस मंदिर को दुर्योधन ने पूर्व दिशा में बनवाया था, लेकिन भीम ने अपनी अमोघ शक्ति से इसे नींव सहित पश्चिम दिशा में घुमा दिया. इसी कारण मंदिर का प्रवेश द्वार आज भी पश्चिम दिशा में है. साथ ही, होली पर्व के समय इस गांव में होलिका दहन नहीं होता, क्योंकि मान्यता है कि होलिका दहन होने पर भगवान शिव के पांव जलते हैं. यह मंदिर जमीन से लगभग 15 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

सहारनपुर जनपद की देवों की नगरी देवबंद में मां बाला सुंदरी मंदिर के समीप स्थित भगवान शिव का यह मंदिर महाभारत काल से स्थापित है. अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी. भीम ने भगवान शिव की पूजा के लिए अपने हाथों से एक अनोखा शिवलिंग स्थापित किया था, जिस पर लगभग 11 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां 41 दिन लगातार जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं आज भी पूर्ण होती हैं.
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सहारनपुर में द्वापर युग में स्थापित पौराणिक नकुलेश्वर महादेव मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है. महाभारत काल के दौरान पांडव पुत्र नकुल महाराज ने यहां अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था. कहा जाता है कि भगवान शिव के परम भक्त नकुल महाराज ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी और पास ही एक कुआं शिव के जलाभिषेक के लिए खुदवाया था. शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु यहां आकर जलाभिषेक करते हैं. नकुलेश्वर महादेव सभी की मन्नतें पूरी करते हैं.

सहारनपुर में कई शिवालय हैं, लेकिन इनमें से भूतेश्वर महादेव मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है. कहा जाता है कि पांडवों ने इस मंदिर में भगवान महादेव की पूजा की थी. पूजा से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने दर्शन देकर कौरवों से जीत का आशीर्वाद भी दिया था. मंदिर में कई लोगों ने 20 फीट लंबे सफेद दाढ़ी वाले बाबा को भी देखा है. इतना ही नहीं, हनुमान जी भी मंदिर का भ्रमण करते हुए दिखाई देते हैं.