साल 1930 से गाजीपुर की सदी पुरानी चल रही अंसारी जी की फैब्रिक दुकान, जहां क्वालिटी और ईमानदारी आज भी जिंदा

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साल 1930 से गाजीपुर की सदी पुरानी चल रही अंसारी जी की फैब्रिक दुकान, जहां क्वालिटी और ईमानदारी आज भी जिंदा


गाजीपुर. बदलते दौर में, जहां रेडीमेड कपड़ों और ऑनलाइन शॉपिंग का बोलबाला है, वहीं गाजीपुर के पुराने बाजार ‘लाल दरवाजा’ और ‘प्रकाश टॉकीज’ के बीच में एक ऐसी दुकान है जो आज भी अपनी साख और धागे की मजबूती पर टिकी हुई है. वर्ष 1930 से शुरू हुई अंसारी जी की यह दुकान न केवल कपड़ा बेच रही है, बल्कि लगभग सौ साल से चल रही इस दुकान ने समय के साथ फैशन बदला है, लेकिन भरोसा कभी नहीं. लोकल 18 बातचीत में अंसारी जी बताते हैं कि उनके यहां हर तरह का फैब्रिक मिलता है, सौ रुपये प्रति मीटर से लेकर तीन हजार रुपये प्रति मीटर तक. यहां गुड मॉर्निंग कपड़ा, कुर्ता और आस्तीन का कपड़ा, सूटिंग-शर्टिंग, दुपट्टा, अस्तर और प्रिंटेड फैब्रिक के साथ-साथ कुछ खास रेंज भी मौजूद हैं.

मौसम और ट्रेंड के हिसाब से ग्राहकों की पसंद बदलती रहती

अंसारी जी बताते हैं कि मौसम और ट्रेंड के हिसाब से ग्राहकों की पसंद बदलती रहती है. गर्मियों में हल्का और हवादार लिनन और टिकाऊ जैम कॉटन ज्यादा पसंद किया जाता है. सदाबहार रुबिया, पारंपरिक कुर्तों के लिए रुबिया 2×2 आज भी पहली पसंद है. लिनन और जैम कॉटन गर्मियों में काफी पसंद किए जाते हैं. लिनन हल्का और हवा पास करने वाला कपड़ा है, जो कुर्ता और शर्ट के लिए बढ़िया माना जाता है. जैम कॉटन थोड़ा मोटा और टिकाऊ होता है, जो रोजमर्रा के पहनावे में काम आता है. ग्लास कॉटन मुलायम और हल्का होता है, और अक्सर दुपट्टों और कुर्तियों में इस्तेमाल होता है. रुबिया 2×2 एक मजबूत और सिंपल टेक्सचर वाला कपड़ा है, जिसे खासकर पारंपरिक कुर्तों में पसंद किया जाता है. इसके अलावा ‘लिजी बिजी’ नाम से चलने वाला डिजाइनर कपड़ा भी युवाओं में ट्रेंड कर रहा है, जो हल्के प्रिंट और मॉडर्न लुक के लिए जाना जाता है.

90% महिला ग्राहक और कपड़े को छूकर परखना

अंसारी जी के अनुसार, उनके व्यापार का मुख्य आधार महिला ग्राहक हैं, वे कहते हैं कि ऑनलाइन बाजार अपनी जगह है, लेकिन जो लोग क्वालिटी के पारखी हैं, वे कपड़ा छूकर और उसकी बुनावट देखकर ही संतुष्ट होते हैं. यहां आज भी गांवों से पुराने ग्राहक सिर्फ भरोसे के नाम पर आते हैं. कहते हैं कि गाजीपुर के जितने भी ग्रामीण ग्राहक हैं, वे आज भी भरोसे के नाम पर ही दुकान पर आते हैं.

व्यापार का मूल मंत्र: ईमानदारी

दुकान के संचालक अंसारी जी का मानना है कि व्यापार सिर्फ मुनाफे का नाम नहीं है. वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, “अगर नीयत साफ हो और ग्राहक के साथ ईमानदारी बरती जाए, तो बरकत अपने आप होती है.” इसी सिद्धांत ने इस दुकान को लगभग 100 साल से बाजार में मजबूती से खड़ा रखा है.



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