सावधान! क्या आपका भी फूलता है दम? दिल की ये 3 बीमारियां हो सकती हैं जानलेवा
ग्रेटर नोएडा: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बिगड़ते लाइफस्टाइल ने हमारे दिल को सबसे ज्यादा खतरे में डाल दिया है. सीने में हल्का सा दर्द या सांस का फूलना सिर्फ थकान नहीं, बल्कि दिल की किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने दिल की बीमारियों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटते हुए उनके लक्षणों और आधुनिक इलाज पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. आइए जानते हैं कि कैसे आप अपने दिल की धड़कनों को सुरक्षित रख सकते हैं.
कोरोनरी आर्टरी डिजीज: जब नसों में आ जाए रुकावट
फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट कंसल्टेंट डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने बताया कि पहली और सबसे आम बीमारी है हार्ट की नसों में ब्लॉकेज, जिसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है. इसमें दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट आ जाती है. जब यह रुकावट ज्यादा बढ़ जाती है, तो हार्ट अटैक का खतरा पैदा हो जाता है. इसके लक्षणों में सीने में दर्द, भारीपन, कंधे या हाथ में दर्द और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं. यह स्थिति अचानक जानलेवा भी साबित हो सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
हार्ट फेलियर: कमजोर पंपिंग है खतरे की घंटी
दूसरी गंभीर समस्या है हार्ट फेलियर. इस स्थिति में दिल की पंपिंग क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है, जिससे शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता. इसके मरीजों को अक्सर सांस फूलने, जल्दी थकान होने और पैरों में सूजन जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और लंबे समय तक चलती है. ऐसे मरीज बार-बार सांस की समस्या लेकर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं और जांच में हार्ट की पंपिंग कम पाई जाती है.
आधुनिक तकनीक: बिना चीरे के लगा पेसमेकर
उन्होंने बताया कि तीसरी तरह की बीमारी है दिल की धड़कन से जुड़ी समस्या, जिसे एरिदमिया कहा जाता है. इसमें दिल की धड़कन या तो बहुत धीमी हो जाती है या बहुत तेज हो जाती है. जब धड़कन बहुत कम हो जाती है, तो उसे हार्ट ब्लॉक कहा जाता है, जिसमें हार्ट रेट 30 से 40 बीट प्रति मिनट तक गिर सकती है. इसके कारण चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, जब दिल बहुत तेज धड़कता है, तो घबराहट, पसीना और बेचैनी महसूस होती है.
आधुनिक तकनीक: बिना चीरे के लगा पेसमेकर
कहा कि हाल ही में एक दिलचस्प मामला सामने आया, जिसमें विदेश से आए एक मरीज को हार्ट ब्लॉक की समस्या थी और उसकी हार्ट रेट काफी कम थी. मरीज बिना सर्जरी के इलाज चाहता था. ऐसे में डॉक्टरों ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बिना किसी चीरा या पॉकेट बनाए लीडलेस ड्यूल चैंबर पेसमेकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया. यह तकनीक देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही उपलब्ध है और मरीजों के लिए कम जोखिम वाला विकल्प बनती जा रही है.
समय-समय पर चेक कराएं हार्ट, लें संतुलित आहार
डॉक्टरों का कहना है कि इन तीनों प्रकार की बीमारियों का डायग्नोसिस अलग-अलग टेस्ट के जरिए किया जाता है, जैसे ईसीजी, ईको और अन्य जांचें. सही समय पर जांच और इलाज से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि बचाव के लिए सबसे जरूरी है लाइफस्टाइल में सुधार. संतुलित आहार लें, जिसमें कम तेल और कम मसाले हों. नियमित व्यायाम करें और तनाव को नियंत्रित रखें. साथ ही, ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही तीन मुख्य कारण दिल की बीमारियों को जन्म देते हैं.
कहा कि है कि अगर दिल से जुड़ी समस्याओं को शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, तो गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है. इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर हार्ट चेकअप जरूर कराएं. जिससे दिल स्वस्थ रहेगा, तो जीवन भी सुरक्षित और खुशहाल रहेगा.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.