सुल्तानपुर: इस्लाम कबूलते ही शुरू हुआ इस हिंदू राजा का बैड लक, आज वंशज गरीबी में बिता रहे जीवन
सुल्तानपुर: इस दुनिया में अक्सर उन्हीं लोगों की चर्चा होती है जो या तो अर्श पर रहते हैं या फिर फर्श पर. कुछ कहावतें भी काफी लंबे समय से प्रचलित हैं, जैसे राजा और रंक, गरीब और अमीर, राजा और फकीर. अक्सर राजा का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में यही आता है कि उसके पास कई सौ बीघे की रियासत होगी.
धन-दौलत जमीन-जायदाद सब उसके पास होगा, लेकिन आज हम सुल्तानपुर के एक ऐसे राजा के बारे में बात करने वाले हैं, जिसकी रियासत कभी बिहार के गया तक हुआ करती थी. लगभग 450 किलोमीटर की रियासत वाला वह राजवंश परिवार आज अपने अंतिम राजा के रूप में भी मौजूद है, लेकिन यह राजा आप साढे चार सौ किलोमीटर नहीं, बल्कि भारत का सबसे गरीब राजा कहा जाने लगा है. आइए जानते हैं कि आखिर ये राजा गरीब कैसे हुआ.
सुल्तानपुर की हसनपुर रियासत
यूपी के जिला सुल्तानपुर ने अंग्रेजी हुकूमत के साथ-साथ मुगलिया हुकूमत का दौर भी देखा है. रियासत और राजाओं की बात करें तो जनपद में कई राजा हुए, जैसे कुड़वार नरेश, दियरा स्टेट और अमेठी नरेश. इसके अलावा भी छोटी-छोटी रियासते रहीं, लेकिन सबसे बड़ी रियासत हसनपुर स्टेट थी, जिसका इतिहास काफी गौरवशाली रहा है.
हसनपुर स्टेट का साम्राज्य कभी सुलतानपुर से बिहार के गया तक फैला हुआ था. शेरशाह सूरी के वक्त हसनपुर स्टेट को सेकेंड किंग ऑफ इंडिया का खिताब भी मिला था. बहरहाल आज हसनपुर रियासत में सिर्फ खंडहर बचे हैं और यहां के अंतिम राजा कुंवर मसूद अली इस खंडहर हो चुके महल में अपने परिवार के साथ गुजारा कर रहे हैं. इतनी बड़ी रियासत के राजा की आर्थिक स्थिति आज बदहाली के कगार पर है.
सुल्तानपुर से लेकर गया के बिहार तक फैला था साम्राज्य
लोकल 18 से बातचीत में कुंवर मसूद बताते हैं कि हसनपुर रियासत के राजा त्रिलोकचंद ने इस्लाम धर्म कुबूल कर लिया था, जिसके बाद उन्हें तातार खां के नाम से जाना गया. कुंवर मसूद अली के वंशज राजा मोहम्मद अली खां थे, जो 1952 में इस दुनिया से गुजर गए. कुंवर मसूद कहते हैं कि वे पृथ्वीराज के वंश से हैं, जिसका राज सुल्तानपुर से लेकर बिहार के गया तक फैला हुआ था.
आपको बता दें कि राजा त्रिलोकचंद को बाबर ने इस्लाम धर्म कुबूल करवाया था. 1526 में बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच पानीपत के युद्ध में हसनपुर के राजा त्रिलोकचंद, इब्राहिम लोदी की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे. इस युद्ध में बाबर ने इब्राहीम लोदी को मार गिराया था. जब राजा त्रिलोकचंद से बाबर का सामना हुआ तो बाबर ने पूछा कि तुम भागे क्यों नहीं तो उन्होंने जवाब दिया कि क्षत्रिय कभी पीठ पर वार नहीं लेता. बहरहाल बाबर ने त्रिलोकचंद को धमकाकर जबरन इस्लाम धर्म कुबूल करवा दिया. कुंवर मसूद का कहना है कि हम लोग पूर्व में क्षत्रिय रहे हैं. इसलिए भगवान राम भी हमारे वंश के ही हैं.
अब स्थिति है खराब
हसनपुर रियासत के राजा अब राजा नहीं, बल्कि एक सामान्य जीवन जी रहे हैं. हसनपुर रियासत के वंशज कुंवर मसूद अली के सात बेटे और दो बेटियां हैं. एक बेटा वकालत की पढ़ाई कर रहा है, एक बेटा व्यापार करता है तो वहीं एक बेटा आईटीआई कर रहा है. कुंवर मसूद अली साधारण जीवन जीते हैं. उनके पास ना तो कोई चार पहिया वाहन है और ना ही अब कोई राजा वाला ग्लैमर है.