सुल्तानपुर का वह आश्रम, जहां के ध्वज से शुरू होता है प्रयागराज महाकुंभ, 500 सालों से भी अधिक पुराना है इतिहास 

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सुल्तानपुर का वह आश्रम, जहां के ध्वज से शुरू होता है प्रयागराज महाकुंभ, 500 सालों से भी अधिक पुराना है इतिहास 


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Sultanpur News: प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत में होने वाला ध्वजारोहण सुल्तानपुर के 500 वर्ष पुराने सगरा आश्रम से भेजे गए ध्वज से होता है. महंतों द्वारा विधि-विधान से तैयार यह ध्वज हर महाकुंभ में प्रयागराज भेजा जाता है. यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी आस्था और सम्मान के साथ निभाई जाती है.

प्रयागराज महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता को पूरी दुनिया ने देखा, लेकिन क्या आपको पता है प्रयागराज महाकुंभ की जब शुरुआत होती है, तो वहां पर जो ध्वजारोहण होता है वह ध्वज कहां से लाया जाता है. अगर नहीं, तो आज हम आपको बताने वाले हैं. दरअसल सुल्तानपुर के बंधुआ कला में एक सगरा आश्रम है और इस सगरा आश्रम से ही प्रयागराज महाकुंभ की शुरुआत के समय ध्वजा रोहण किया जाता है. यह आश्रम लगभग 500 वर्ष पुराना है. इसकी इमारत भी 500 वर्षों से अधिक पुरानी मानी जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं क्या है सगरा आश्रम का इतिहास…

यह है इतिहास 
सुल्तानपुर शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर सगरा आश्रम का इतिहास 500 वर्षों से अधिक पुराना माना जाता है. इस आश्रम के महंत डाक्टर स्वामी दयानंद मुनि बताते हैं कि बाबा सहजराम का बंधुआ कला में आगमन लगभग 1600 ईस्वी में हुआ था वे अयोध्या से लखनऊ होते हुए आए. उन्होंने सगरा पर एक छोटी कुटिया बनाई और यहीं रहने लगे. इस आश्रम के ठीक सामने लगभग तीन एकड़ क्षेत्र में एक बड़ा सागर भी मौजूद है.

महाकुंभ में यहां से जाता है झंडा 
डॉ स्वामी दयानंद मुन बताते हैं कि प्रयागराज में जब महाकुंभ की शुरुआत होती है तो सबसे पहले लगाए जाने वाला ध्वज यहीं का होता है. इसी सगरा आश्रम से ही ध्वज महाकुंभ भेजा जाता है. तब जाकर महाकुंभ की शुरुआत होती है. यह प्रचलन आज से नहीं बल्कि कई सालों से चला आ रहा है.

यह कथा भी है प्रचलित 
स्थानीय लोगों की मानें तो इस आश्रम में एक साधु शेर पर सवार होकर, हाथ में सांप लिए आश्रम पहुंचे थे. उस समय बाबा सहजराम दीवार पर बैठकर दातून कर रहे थे. उन्होंने दीवार को चलने का आदेश दिया. दीवार साधु तक पहुंच गई थी. इस चमत्कार से प्रभावित साधु वहीं रुक गए और बाबा ने उन्हें 85 बीघा बाग दिया, जिसे जोगिया वन कहा जाने लगा. चैत्र और कार्तिक में यहां मेला लगता है. इस मेले में लकड़ी के सामान की खरीद-बिक्री होती है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

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सुल्तानपुर का वह आश्रम, जहां के ध्वज से शुरू होता है प्रयागराज महाकुंभ



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