सेहत के लिए ज़हर है ये मछली! खाने से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा, जानिए क्यों इसे पालना भी है गैरकानूनी?
अलीगढ़: आमतौर पर मछली को पौष्टिक आहार माना जाता है और लोग इसे सेहत के लिए लाभकारी समझकर खाते भी हैं. लेकिन अलीगढ़ में फिशरी विभाग ने एक ऐसी मछली को लेकर लोगों को सतर्क किया है, जो दिखने ,में आम मछलियों जैसी होती है, लेकिन इसके नुकसान बेहद गंभीर हैं. इस मछली का नाम थाई मांगोर है, जिसका सेवन जहां स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया गया है, वहीं इसका पालन और बिक्री करना कानूनन अपराध भी है.
उन्होंने बताया कि इस मछली में लेड यानी सीसा की मात्रा भी अधिक पाई जाती है, जो मानव शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक मानी जाती है. लंबे समय तक इसका सेवन करने से शरीर पर इसका दुष्प्रभाव और भी बढ़ जाता है.
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी खतरा
इंद्रपाल सिंह के अनुसार, थाई मांगोर मछली से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. इसमें पाए जाने वाले कुछ तत्व लंबे समय तक शरीर में जमा होकर घातक असर डाल सकते हैं. यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी इस मछली को खाने से बचने की सलाह देते हैं.
पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक मछली
थाई मांगोर सिर्फ इंसानी सेहत के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है. यह एक कैट फिश प्रजाति है, जो तालाबों और जलाशयों में मौजूद छोटी और स्थानीय मछलियों को तेजी से नष्ट कर देती है. इससे जलाशयों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है और जलीय जीवन को भारी नुकसान पहुंचता है.
सरकार ने लगाया पूर्ण प्रतिबंध, कार्रवाई का प्रावधान
इन्हीं खतरों को देखते हुए सरकार ने थाई मांगोर मछली पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है. यदि कोई व्यक्ति इस मछली का पालन करता है या बाजार में इसकी बिक्री करता पाया जाता है, तो पहले उसे पालन बंद करने का नोटिस दिया जाता है. नोटिस के बावजूद नियमों का पालन न करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ धारा 270 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है.
इसके अलावा, यदि किसी तालाब या जल स्रोत में यह मछली पाई जाती है, तो उसे पकड़ने और नष्ट करने में आने वाला पूरा खर्च भी संबंधित व्यक्ति या लाभार्थी को ही उठाना पड़ता है.
फिशरी विभाग की लोगों से अपील
फिशरी विभाग ने आम जनता और मछली पालकों से अपील की है कि वे प्रतिबंधित थाई मांगोर मछली से पूरी तरह दूर रहें. केवल वैध और सुरक्षित मछली प्रजातियों का ही पालन और सेवन करें, ताकि लोगों की सेहत भी सुरक्षित रहे और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे.