‘हमें मरने की इजाजत दिला दीजिए’, गाजियाबाद के इन गांवों में सर्दी-जुकाम की तरह फैल रहा कैंसर, कैसे बिगड़े हालात? Ground Report
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Ground Report Toxic Water Ghaziabad : यहां गांव के पानी का टीडीएस जो कभी 100 था, अब बढ़कर 1500 के पार पहुंच चुका है. लोग गांव छोड़कर पलायन को मजबूर हैं. ग्रामीण कहते हैं कि या तो ये जहरीला पानी बंद कराइए, या हमें मरने की इजाजत दीजिए. शकलपुरा के राजबीर बताते हैं कि उनके गांव में 40 से अधिक कैंसर मरीज हैं. पास के जवाली गांव में इनकी संख्या 100 से ज्यादा है. फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया गया है, लेकिन 20 साल पहले गांव में जो पाइपलाइन डाली गई थी, उसमें अब फैक्ट्रियों का गंदा पानी बह रहा है.
गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में स्थित ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल युक्त जहरीला पानी अब ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट बन गया है. आसपास के कई गांवों के लोग इस दूषित पानी से परेशान हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी भू-जल को तेजी से दूषित कर रहा है जिसके कारण गांवों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं. ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र को यूपीसीडा की ओर से करीब 25 साल पहले विकसित किया गया था. वर्तमान में यहां हजारों फैक्ट्रियां संचालित हैं जिनमें सैकड़ों फैक्ट्रियों में केमिकल से जुड़ा काम होता है. इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया गया है. इसी प्लांट के जरिए करीब 12 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से पानी को शकलपुरा और जावली गांव के पास नहर में छोड़ा जाता है.
इसी से खेती
लोकल 18 से बात करते हुए ग्रामीणों का कहना है कि ट्रीटमेंट के बावजूद नहर का पानी जहरीला होता जा रहा है. इस पानी से खेती हो रही है और यही पानी धीरे-धीरे घरों तक पहुंच रहा है. हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. दर्जनभर से ज्यादा गांव जिनकी आबादी 50 हजार से अधिक है, इस समस्या से प्रभावित हैं.
शकलपुरा गांव के निवासी प्रवीण कुमार बताते हैं कि करीब 20 साल पहले गांव में जो पाइपलाइन डाली गई थी, उसमें अब साफ पानी की जगह फैक्ट्रियों का गंदा पानी बह रहा है. इस पानी से न केवल खेती बर्बाद हो रही है बल्कि लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. शकलपुरा, जवाली और सिकरानी जैसे गांव नहर के आसपास होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. ग्रामीणों का दावा है कि जहरीले पानी के कारण कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और लोग मजबूरी में इसी पानी से खेती कर रहे हैं.
कैसे बिगड़े हालात
ग्रामीण सुमित कसाना का कहना है कि ट्रॉनिका सिटी की इंडस्ट्रीज का गंदा पानी वर्षों से नहर में डाला जा रहा है. कई बार जिला प्रशासन से शिकायत की गई लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. करीब दस साल पहले गांव के पानी का टीडीएस 100 के आसपास था जो अब बढ़कर 1500 के पार पहुंच चुका है. पानी का टीडीएस (TDS) का मतलब कुल घुलित ठोस (Total Dissolved Solids) है, जो पानी में घुले सभी अकार्बनिक और कार्बनिक पदार्थों की कुल मात्रा को मापता है. हालात इतने खराब हैं कि लोग गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. ग्रामीणों का दर्द इस बात से झलकता है कि वे कहते हैं या तो यह जहरीला पानी बंद कराइए, या हमें मरने की अनुमति दे दीजिए.
ये बीमारियां भी घेर रहीं
शकलपुरा के राजबीर के अनुसार उनके गांव में 40 से अधिक कैंसर मरीज हैं जबकि पास के जवाली गांव में यह संख्या लगभग 100 के पार है. हर साल कैंसर से मौतें भी हो रही हैं लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया. गांव प्रधान शिवानंद का कहना है कि गंदे पानी के कारण कैंसर के साथ-साथ हार्ट, किडनी, लीवर और स्किन की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. खेतों से लेकर रसोई तक जहरीला पानी पहुंच चुका है, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बीमार हो रहे हैं. आधा दर्जन से अधिक गांव जिनकी आबादी 50 हजार से ज्यादा है, इस संकट से प्रभावित हैं.
क्या बोले विधायक
लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने माना कि फैक्ट्रियों का गंदा पानी नहरों में मिल रहा है. उन्होंने बताया कि एसटीपी प्लांट बना तो है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और टूटी लाइनों के कारण उसे सही ढंग से नहीं चलाया जा रहा. विधायक ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और कई गांवों में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताया जाएगा.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें