हाथों की लिखावट या टाइपिंग? जनता दर्शन में आवेदन देख कानपुर DM भी हुए कंफ्यूज
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Kanpur News: यूपी के कानपुर में जनता दर्शन के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने कुछ समय के लिए लोगों को हैरत में डाल दिया. दरअसल यहां एक फरियादी सादे कागज पर ऐसा फरियाद लिखकर ले आया, जिसे देख मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और फरियादी भी हैरान रह गए. आइए आपको पूरा माजरा बताते हैं.
कानपुर: कभी-कभी एक साधारण सी चीज भी लोगों को हैरान कर देती है. कानपुर के जनता दर्शन में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब एक आवेदन पत्र को देखकर हर कोई कंफ्यूज हो गया कि यह हाथ से लिखा है या कंप्यूटर से टाइप किया गया है. जनता दर्शन के दौरान जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने जब यह आवेदन पहुंचा, तो उन्होंने उसे ध्यान से देखा. कागज पर लिखे अक्षर इतने साफ, सधे और एक जैसे थे कि पहली नजर में लगा जैसे यह कंप्यूटर से टाइप करके प्रिंट किया गया हो. लेकिन जब पास जाकर देखा गया, तो पता चला कि यह पूरी तरह हाथ से लिखा गया है.
हर किसी को चौंकाने वाली लिखावट
मोतियों की तरह सजी लिखावट को देखकर वहां मौजूद अधिकारी, कर्मचारी और फरियादी भी हैरान रह गए. कई लोग उस आवेदन को बार-बार देखकर उसकी तारीफ करने लगे. कुछ देर के लिए पूरा माहौल उसी आवेदन की चर्चा में बदल गया. जब जिलाधिकारी ने आवेदन देने आए नरवल निवासी रामसजीवन से पूछा कि यह किसने लिखा है, तो उन्होंने बताया कि यह उनकी पोती शिवानी ने लिखा है, जो कक्षा दस की छात्रा हैं. यह सुनकर डीएम भी काफी प्रभावित हुए और उन्होंने छात्रा की जमकर सराहना की.
लिखावट बनी समाधान की वजह
इस आवेदन में पेड़ों से जुड़े एक विवाद का जिक्र था. जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम नरवल विवेक कुमार मिश्रा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले का समाधान कराया. इस तरह एक सुंदर लिखावट ने न सिर्फ सबका ध्यान खींचा, बल्कि समस्या के समाधान में भी अहम भूमिका निभाई.
डीएम ने किया सम्मानित, मिली नई पहचान
बुधवार को जिलाधिकारी ने शिवानी को अपने कार्यालय बुलाकर सम्मानित किया. उन्हें पेन सेट, किताबें और स्कूल बैग भेंट किए गए. साथ ही उनकी कॉपियों का भी अवलोकन किया गया. हर पेज पर एक जैसी सुंदर और सजी लिखावट देखकर डीएम ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. शिवानी महर्षि दयानंद बब्बू लाल इंटर कॉलेज, उमरी नरवल की छात्रा हैं. खास बात यह है कि उन्होंने कभी किसी कैलियोग्राफी का प्रशिक्षण नहीं लिया, फिर भी उनकी लिखावट इतनी आकर्षक है कि देखने वाला खुद-ब-खुद तारीफ करने लगता है.
उनके बाबा रामसजीवन बताते हैं कि शिवानी को बचपन से ही साफ-सुथरा लिखने की आदत है. वह जब भी किसी के लिए कुछ लिखती है, लोग उसकी लिखावट की सराहना जरूर करते हैं. यह घटना यह साबित करती है कि मेहनत और अच्छी आदतें इंसान को अलग पहचान दिला सकती है. शिवानी की लिखावट आज सिर्फ अक्षर नहीं, बल्कि उसकी पहचान बन गई है, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.