1 पौधा और 25,000 बीज! मीलों दूर तक तबाही फैला सकती है ये कांग्रेस घास, ऐसे करें खात्मा
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Congress Grass Control Tips: खेतों से लेकर सड़कों के किनारे तक सफेद फूलों वाली जिस घास को आप साधारण समझते हैं, वह असल में एक ‘साइलेंट किलर’ है. वैज्ञानिक रूप से ‘पार्थेनियम’ कही जाने वाली इस कांग्रेस घास ने न केवल मिट्टी की उर्वरता को 40% तक घटा दिया है, बल्कि यह इंसानों में अस्थमा और चर्म रोग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन रही है. कृषि एक्सपर्ट डॉ. एनसी त्रिपाठी ने आगाह किया है कि एक छोटा सा पौधा 25,000 बीज पैदा कर हवा के जरिए मीलों तक जहर फैला सकता है. जानिए कैसे आप इस जहरीली घास को जड़ से वैज्ञानिक तरीके से मिटा सकते हैं.
अक्सर हम अपने घरों के आसपास, सड़क किनारे या खेतों की मेढ़ों पर एक सफेद फूल वाली घास देखते हैं जिसे गाजर घास या कांग्रेस घास कहा जाता है. दिखने में यह भले ही साधारण लगे, लेकिन यह असल में एक जहरीला दुश्मन है. यह घास न सिर्फ हमारी फसलों का पोषण छीन लेती है, बल्कि इसके संपर्क में आने से इंसानों को स्किन से जुड़ी परेशानियां और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. अगर इसे समय रहते जड़ से खत्म न किया जाए, तो यह बहुत तेजी से फैलकर पूरी जमीन और वातावरण को खराब कर देती है.

कांग्रेस घास वैज्ञानिक रूप से ‘पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस’ के नाम से जानी जाने वाली यह घास बेहद जहरीली होती है. इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में एक्जिमा, अस्थमा, और एलर्जी जैसी बीमारियां हो जाती हैं. इसके बारीक परागकण हवा में घुलकर श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं. पशुओं के लिए भी यह घातक है, इसे चरने से उनके दूध में कड़वाहट आ जाती है और गंभीर स्थिति में उनकी मृत्यु भी हो सकती है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ एनसी त्रिपाठी ने बताया कि इस घास के फैलने की क्षमता अद्भुत है. इसका एक छोटा सा पौधा एक सीजन में 10,000 से 25,000 बीज पैदा कर सकता है. ये बीज इतने हल्के होते हैं कि हवा, पानी, जूतों या वाहनों के टायरों के जरिए मीलों दूर तक पहुंच जाते हैं. यह किसी भी प्रकार की मिट्टी और जलवायु में खुद को ढाल लेती है, जिससे इसे रोकना बहुत मुश्किल होता है.
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खेती के लिए यह घास किसी दुश्मन से कम नहीं है. यह जमीन से पोषक तत्वों और नमी को बड़ी तेजी से सोख लेती है, जिससे मुख्य फसल को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है. यह मिट्टी में कुछ ऐसे रसायन छोड़ती है, जो अन्य पौधों के अंकुरण को रोक देते हैं. इसके कारण फसलों की पैदावार में 40% तक की भारी गिरावट देखी जा सकती है.

कांग्रेस घास न केवल फसलों को, बल्कि हमारे प्राकृतिक चरागाहों और स्थानीय औषधीय पौधों को भी नष्ट कर रही है. जहां यह उगती है, वहां दूसरी कोई वनस्पति नहीं पनप पाती है. यह स्थानीय पर्यावरण तंत्र का संतुलन बिगाड़ देती है, जिससे वन्यजीवों और पालतू जानवरों के लिए चारे का संकट खड़ा हो जाता है. यह जैव विविधता के लिए एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह काम करती है.

इसे रोकने का सबसे सरल तरीका ये है कि इसे फूल आने से पहले जड़ से उखाड़कर फेंक दें. उखाड़ते समय दस्ताने और मास्क पहनना जरूरी है. जैविक नियंत्रण के लिए जाइगोग्रामा बिचलोराटा’ नामक कीट का उपयोग किया जाता है, जो केवल इसी घास को खाता है. साथ ही, मेढ़ों पर गेंदा या चक्रमर्द जैसे पौधे लगाकर इसके विकास को प्राकृतिक रूप से रोका जा सकता है.

अगर घास बहुत अधिक फैल चुकी है, तो रसायनों का सहारा लिया जा सकता है. ग्लाइफोसेट 1.0 -1.5% या मेट्रीब्यूजाइन जैसे खरपतवारनाशकों का छिड़काव इसे प्रभावी ढंग से खत्म कर सकता है. इसके अलावा, सामान्य नमक का 15-20% का घोल बनाकर छिड़कने से भी यह घास सूख जाती है. याद रखें, रसायनों का प्रयोग हमेशा विशेषज्ञों की सलाह और सुरक्षा सावधानियों के साथ ही करना चाहिए.

कांग्रेस घास का उन्मूलन केवल एक व्यक्ति या किसान के बस की बात नहीं है. इसके लिए सामुदायिक प्रयास आवश्यक हैं. सरकार द्वारा गांव और मोहल्लों में ‘गाजर घास उन्मूलन सप्ताह’ मनाकर खाली पड़ी जमीनों पर सफाई भी की जाती है, क्योंकि जब तक हर नागरिक जागरूक होकर इसे अपने आसपास से नहीं हटाएगा, तब तक इसके बीजों का प्रसार रोकना असंभव है. स्वच्छता ही इसके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.