1 लाख का निवेश, मोटरसाइकिल और 4 घंटे काम! इस बिजनेस ने बदली बिहार के शख्स की किस्मत, जानें पूरा फॉर्मूला
अयोध्या: कहते हैं इंसान की जिंदगी में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है, जब एक जगह की यात्रा उसकी पूरी किस्मत बदल देती है. कुछ ऐसा ही हुआ बिहार के सासाराम जिले के रहने वाले रमेश दुबे के साथ. एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले रमेश दुबे आज अयोध्या में मेहनत, आस्था और आत्मविश्वास के दम पर अपनी नई पहचान बना चुके हैं. अयोध्या आकर उन्होंने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि कई लोगों को रोजगार देकर दूसरों की जिंदगी भी संवार दी.
करीब चार साल पहले तक रमेश दुबे हैदराबाद, तेलंगाना में रहते थे. वहां उन्होंने लगभग ₹1,00,000 का निवेश कर छोटा सा व्यवसाय शुरू किया था. कड़ी मेहनत के बावजूद उनकी मासिक आय लगभग ₹30,000 तक ही सीमित थी. इसी दौरान अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हुआ. मंदिर निर्माण के समय रमेश दर्शन के लिए अयोध्या आए. यहां का माहौल, आस्था और बढ़ती संभावनाएं उन्हें बेहद पसंद आईं. यही यात्रा उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई.
अयोध्या से लौटने के बाद रमेश दुबे ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने हैदराबाद में चल रहा अपना कारोबार बंद कर अयोध्या में ही नया व्यवसाय शुरू करने का मन बनाया. लगभग सवा लाख रुपये के निवेश से उन्होंने मोटरसाइकिल पर चलने वाली इडली और डोसा की मोबाइल दुकान शुरू की. उनका यह व्यवसाय सुबह 5 बजे से सुबह 10 बजे तक, यानी सिर्फ चार घंटे चलता है. शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने उनके स्वाद को हाथों हाथ लिया और कारोबार तेजी से चल निकला.
आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. जहां पहले रमेश दुबे को पूरे महीने मेहनत करने के बाद भी ₹30,000 की कमाई होती थी, वहीं अब अयोध्या में सिर्फ चार घंटे काम करके उससे कहीं ज्यादा बचत हो जाती है. प्रभु श्रीराम की कृपा से उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान समय में अयोध्या में उनकी दो मोबाइल इडली-डोसा की दुकानें मोटरसाइकिल पर सफलतापूर्वक चल रही हैं.
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दूसरों का भी सहारा बने रमेश दुबे
इस व्यवसाय की सबसे खास बात यह है कि रमेश दुबे ने सिर्फ अपनी ही नहीं, बल्कि दूसरों की भी किस्मत बदली है. उन्होंने इस काम से 2 से 5 लोगों को रोजगार दिया है. ये लोग अलग-अलग जगहों पर इडली और डोसा बेचते हैं और अच्छी आमदनी कर रहे हैं. इससे कई परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है.
रमेश दुबे बताते हैं कि अयोध्या आने का उनका कोई खास व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था. वह केवल दर्शन के लिए आए थे, लेकिन प्रभु श्रीराम ने यहीं उनकी किस्मत बदल दी. आज न तो उन्हें हैदराबाद लौटने का मन करता है और न ही कहीं और जाने की जरूरत महसूस होती है. अयोध्या में आस्था और आजीविका का यह संगम उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. रमेश दुबे की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो मेहनत और विश्वास के बल पर कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं.