1 हेक्टेयर खेत में डालें भूरे रंग का 10 KG ये खाद… टमाटर जैसी बड़ी होंगी लहसुन की कलियां, जानें धांसू तरीका

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1 हेक्टेयर खेत में डालें भूरे रंग का 10 KG ये खाद… टमाटर जैसी बड़ी होंगी लहसुन की कलियां, जानें धांसू तरीका


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Garlic Farming Tips : लहसुन की खेती में कंद का छोटा रह जाना किसानों की आम समस्या है, लेकिन यदि बुवाई के समय खेत में केवल 10 किलो बोरॉन (Boron) डाल दिया जाए तो कलियों का आकार टमाटर जैसा मोटा और चमकदार बन जाता है. गौरतलब है कि बोरॉन भूरे रंग का सूक्ष्म पोषक तत्व है. मिट्टी में बोरॉन की कमी से लहसुन के कंद सही आकार नहीं ले पाते.

शाहजहांपुर : लहसुन की खेती का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर तक माना जाता है, क्योंकि इस दौरान तापमान 15 से 20 डिग्री सेल्सियस रहता है जो अंकुरण और कंद बनने के लिए आदर्श होता है. रबी सीजन में की जाने वाली यह फसल दोमट या हल्की दोमट मिट्टी में बेहतर बढ़ती है, जिसमें जल निकासी अच्छी हो और pH 6.5–7.5 के बीच हो. गौरतलब है कि लहसुन कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसका इस्तेमाल हर घर में मसाले के तौर पर किया जाता है.

लहसुन की फसल लगभग 140–160 दिनों में तैयार हो जाती है और प्रति एकड़ औसत उत्पादन 35 से 50 क्विंटल तक मिलता है, जबकि उन्नत प्रबंधन में 60 क्विंटल से अधिक भी संभव है. एक्सपर्ट के अनुसार एक एकड़ में कुल लागत 17 से 25 हजार रुपये तक आती है, जबकि बाजार में 40 से 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर किसान 1.5 से 3.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं. सही किस्म, उचित पोषण और समय पर सिंचाई–निराई से यह फसल बेहद लाभदायक साबित होती है.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि किसान नवंबर के महीने में लहसुन की फसल लगा सकते हैं. किसान बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह से तैयारी करें ऐसे खेत का चुनाव करें, यहां जल निकासी बेहतर हो और उन्नत किस्म का ही चयन करें. खेत की अच्छी तरह से तैयारी करने के बाद संतुलित मात्रा में उर्वरकों की पूर्ति करने के बाद ही लहसुन की बुवाई करें. कंद का साइज बड़ा करने के लिए भी अलग से उर्वरक देना चाहिए.

कब और कितना करें उर्वरक का छिड़काव?
किसी भी फसल से अच्छा उत्पादन लेने के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरकों की पूर्ति करें. खेत की अंतिम जुताई के समय 50 क्विंटल गोबर की सड़ी हुई खाद या वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल करें. इसके अलावा रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल भी करें. किसान 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 100 किलोग्राम फास्फोरस, 50 किलोग्राम सल्फर और 50 किलोग्राम पोटाश का इस्तेमाल करें. किसान नाइट्रोजन की आधी मात्रा यानी 50 किलो बुवाई के समय मिट्टी में मिला दें और शेष बची हुई 50 किलोग्राम नाइट्रोजन का इस्तेमाल उस वक्त करें, जब लहसुन की फसल 40 से 45 दिन की हो जाए.

बोरॉन का करें इस्तेमाल
अगर आप चाहते हैं कि लहसुन के कंद का साइज बड़ा हो, जिससे उत्पादन भी बढ़ेगा तो आप बेसल डोज में बोरॉन का इस्तेमाल करें, किसान प्रति हेक्टेयर 10 किलोग्राम बोरॉन का इस्तेमाल कर सकते हैं. बोरॉन का इस्तेमाल खेत की अंतिम जुताई करते समय करना चाहिए और उसके बाद ही लहसुन की फसल लगानी चाहिए.

mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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