13 साल की राखी बनी साध्वी, अब जिंदा रहते हुए होगा पिंडदान, प्रिंसपल ने बताया कैसे हुआ जीवन से मोह भंग

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13 साल की राखी बनी साध्वी, अब जिंदा रहते हुए होगा पिंडदान, प्रिंसपल ने बताया कैसे हुआ जीवन से मोह भंग



आगरा: उत्तर प्रदेश आगरा के डौकी थाना क्षेत्र की रहने वाली 13 वर्षीय कक्षा 9 की छात्रा राखी ने भक्ति के मार्ग को अपनाते हुए साध्वी बनने का निर्णय लिया है. राखी के माता-पिता ने उन्हें प्रयागराज कुंभ में जूना अखाड़े को सौंप दिया है. अब राखी को साध्वी गौरी के नाम से जाना जाएगा.

राखी, जो ट्रकपुरा गांव की रहने वाली हैं, अपने परिवार और गांव वालों के बीच भक्ति और संस्कारों के प्रति लगाव के लिए जानी जाती थीं.चार साल पहले गांव में हुई भागवत कथा ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया. कथा के दौरान कौशल गिरी महाराज के उपदेशों से प्रभावित होकर राखी ने भक्ति मार्ग पर चलने का संकल्प लिया. माता-पिता ने बेटी की इस आस्था को स्वीकार करते हुए उसे जूना अखाड़े में समर्पित कर दिया.

साध्वी बनने की प्रक्रिया 
सोमवार को कुंभ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ राखी का नामकरण संस्कार हुआ. गुरु कौशिक गिरी ने उन्हें शिविर में प्रवेश कराया और अब वे साध्वी गौरी के नाम से जानी जाएंगी. आगामी 19 जनवरी को उनका पिंडदान शिविर में किया जाएगा, जिसके बाद वे हमेशा के लिए गुरु परिवार का हिस्सा बन जाएंगी.

राखी की मां रीमा और पिता संदीप सिंह ने कहा, “बेटी का वैराग्य और भक्ति के प्रति समर्पण देखकर हमने उसे खुशी-खुशी गुरु परिवार को सौंप दिया. यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारी बेटी सनातन धर्म के मार्ग पर चल रही है.”

पढ़ाई में भी मेधावी थी गौरी!
राखी के स्कूल स्प्रिंगफील्ड इंटर कॉलेज के प्रबंधक पीसी शर्मा ने बताया कि राखी शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थी. उन्होंने कहा, \”राखी का स्वभाव धार्मिक और दूसरों के प्रति सरल था. वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी. देवी पूजा के दिनों में वह नंगे पैर स्कूल आती थी.”

धर्म और समाज की नई मिसाल
साध्वी गौरी का यह निर्णय न केवल उनकी आस्था को प्रकट करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि युवा पीढ़ी भी सनातन धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने को तैयार है. राखी के माता-पिता और गुरुजनों का सहयोग उनकी भक्ति यात्रा को और भी प्रेरणादायक बनाता है.

भक्ति का नया अध्याय
अब साध्वी गौरी जूना अखाड़े का हिस्सा बनकर धर्म और सनातन संस्कृति की सेवा करेंगी. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है.

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