15 हजार लागत, लाखों में कमाई, गेहूं-चावल नहीं…दो महीने में तैयार होने वाली इस फसल ने किसान को बनाया मालामाल

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15 हजार लागत, लाखों में कमाई, गेहूं-चावल नहीं…दो महीने में तैयार होने वाली इस फसल ने किसान को बनाया मालामाल


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Tomato Farming Benefits: बाराबंकी के युवा किसान उत्कर्ष ने पारंपरिक खेती छोड़ सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया और टमाटर की खेती से अपनी तकदीर बदल डाली. टमाटर की खेती कर वे हर सीजन में कम लागत पर लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. जानिए उन्होंने कैसे बदली अपनी खेती की दिशा और टमाटर की खेती से कैसे पाई बड़ी सफलता.

बाराबंकी: टमाटर एक ऐसी सब्जी है जिसकी मांग साल के 12 महीने बनी रहती है. इसी कारण किसान टमाटर की खेती को बेहद लाभदायक मानते हैं. टमाटर हर घर की जरूरत है — चाहे सब्जी बनानी हो या सलाद तैयार करना हो, टमाटर सबसे पहले उपयोग में आता है. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी टमाटर की मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि अब कई किसान टमाटर की खेती की ओर रुख कर रहे हैं और कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

बाराबंकी जिले के निजामपुर गांव के रहने वाले युवा किसान उत्कर्ष भी उनमें से एक हैं जिन्होंने मेहनत और नए सोच के दम पर खेती में सफलता की मिसाल कायम की है. उत्कर्ष पिछले कई वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं और आज वे करीब दो बीघे जमीन में देशी टमाटर उगाकर हर फसल पर एक से सवा लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं.

पारंपरिक खेती छोड़ पकड़ी सब्जी उत्पादन की राह
किसान उत्कर्ष बताते हैं कि पहले वे पारंपरिक फसलें उगाते थे, लेकिन उसमें उन्हें खास फायदा नहीं हो रहा था. इसके बाद उन्होंने सब्जियों की खेती की ओर रुख किया और टमाटर से शुरुआत की. उनकी मेहनत रंग लाई और अब टमाटर की खेती से उन्हें लगातार अच्छा मुनाफा हो रहा है.

उन्होंने बताया कि एक बीघे में टमाटर की खेती की लागत करीब 15 से 20 हजार रुपये आती है. वहीं, एक फसल से एक से सवा लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है. बाजार में टमाटर की मांग लगातार बनी रहती है, इसलिए उन्हें हमेशा अच्छा दाम मिलता है और आमदनी भी मजबूत रहती है.

टमाटर की खेती करने की आसान विधि
उत्कर्ष के अनुसार, टमाटर की खेती करना ज्यादा कठिन नहीं है. पहले खेत की गहरी जुताई की जाती है, फिर मेड बनाई जाती हैं. उन मेडों पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर टमाटर के पौधे लगाए जाते हैं. पौधों में गोबर की खाद डाली जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है.

जब पौधे थोड़े बड़े हो जाते हैं, तब उनकी सिंचाई की जाती है. पौधा लगाने के करीब दो महीने बाद टमाटर की फसल तैयार हो जाती है. इसके बाद दो से ढाई महीने तक लगातार फसल तोड़ी जाती है. यही वजह है कि कम समय में ज्यादा उत्पादन होने से टमाटर किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होता है.

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें

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दो महीने में तैयार होने वाली इस फसल ने किसान को बनाया मालामाल



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