2024 में लगा झटका, 2025 में उछाल! श्रीलंका बाजार से फिर उम्मीदें

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2024 में लगा झटका, 2025 में उछाल! श्रीलंका बाजार से फिर उम्मीदें


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श्रीलंका में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता लौटने के साथ भारतीय निर्यातकों के लिए फिर से नए अवसर बनते नजर आ रहे हैं. 2024 की गिरावट के बाद अब व्यापार में तेजी के संकेत मिल रहे हैं. ऐसे में श्रीलंका बिल्डकॉन अंतर्राष्ट्रीय एक्सपो जैसे मंच भारतीय कारोबारियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने का सुनहरा मौका दे रहे हैं.

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कानपुर. एक समय आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका अब तेजी से पटरी पर लौटता दिख रहा है. इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है. 27 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित होने वाला श्रीलंका बिल्डकॉन अंतर्राष्ट्रीय एक्सपो कारोबारियों के लिए बड़ा अवसर लेकर आ रहा है. इस एक्सपो में कई देशों के व्यापारी और खरीदार एक ही स्थान पर मौजूद रहेंगे. कानपुर और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में निर्यातकों के शामिल होने की तैयारी है.

2024 में लगा था बड़ा झटका
साल 2024 में श्रीलंका के अंदर राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट के कारण व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था. भारत से जाने वाले कई ऑर्डर रुक गए, भुगतान अटक गए और नए सौदे भी ठप हो गए. इसका असर कानपुर समेत देश के कई निर्यातकों पर पड़ा. निर्यातकों का कहना था कि अचानक बने हालातों से बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी. कई कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा और भविष्य की योजनाएं भी प्रभावित हुईं.

2025 से पटरी पर लौटी अर्थव्यवस्था
मार्च 2025 के बाद श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलने लगे. आर्थिक सुधारों और स्थिरता के प्रयासों से वहां के बाजार में भरोसा लौटने लगा.
आंकड़ों के मुताबिक:
1) 2023-24 में भारत-श्रीलंका निर्यात कारोबार 5.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा.
2) 2024-25 में यह घटकर 4.72 बिलियन डॉलर पर आ गया.
3) 2025-26 में कारोबार फिर बढ़कर करीब 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.
इन आंकड़ों से साफ है कि व्यापार में दोबारा तेजी आ रही है.

फियो ने जताया भरोसा
इस पूरे मामले पर भारतीय निर्यात संगठनों का संघ (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि 2024 में श्रीलंका के हालातों के कारण निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ था. कई ऑर्डर होल्ड पर चले गए थे, लेकिन 2025 से स्थिति में सुधार आया है और अब भारतीय निर्यातकों के लिए फिर से अच्छे अवसर बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि बिल्डकॉन इंटरनेशनल एक्सपो जैसे मंच पर भाग लेने से निर्यातकों को सीधे खरीदारों से मिलने और नए सौदे करने का मौका मिलेगा.

एक्सपो में भाग लेने के फायदे
इस अंतरराष्ट्रीय एक्सपो में शामिल होने से निर्यातकों को कई लाभ मिल सकते हैं:
1) नए ग्राहकों और बाजारों से जुड़ने का अवसर.
2) बड़े निर्णय लेने वाले अधिकारियों से सीधी मुलाकात.
3) उत्पादों और तकनीक का प्रदर्शन.
4) ब्रांड पहचान को मजबूत करना.
5) पुराने ग्राहकों के साथ संबंध फिर से मजबूत करना.

भारत से श्रीलंका को क्या जाता है निर्यात?
भारत से श्रीलंका को सबसे अधिक निर्यात खनिज ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों का होता है. इसके अलावा:
1) कपास और तैयार वस्त्र.
2) मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण.
3) दवाइयां.
4) चीनी और अन्य खाद्य उत्पाद.
5) वाहन और उनके पुर्जे.
6) कागज, कृषि उत्पाद और रसायन.

नए बाजार की तलाश में अहम अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में नए बाजार तलाशना आसान नहीं है. ऐसे में श्रीलंका में मिल रहा यह अवसर भारतीय निर्यातकों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है. अगर निर्यातक इस एक्सपो में सक्रिय भागीदारी करते हैं, तो आने वाले समय में श्रीलंका एक बार फिर भारतीय उत्पादों के लिए मजबूत बाजार बन सकता है.

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Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



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