5 साल बाद गुमनाम जिंदगी को मिला सहारा, अस्पताल से सीधे अपने परिवार के गले लगी

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5 साल बाद गुमनाम जिंदगी को मिला सहारा, अस्पताल से सीधे अपने परिवार के गले लगी


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बाराबंकी जिला अस्पताल में पांच वर्षों से गुमनामी का जीवन जी रही पार्वती को याददाश्त खोने के बाद उसके परिवार से मिला दिया गया. डीएम की पहल से परिवार ढूंढा गया और भावुक माहौल में पार्वती अपने घर लौट गई.

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चोट के कारण खो चुकी थी याददाश्त

संजय यादव/बाराबंकी- बाराबंकी जिला अस्पताल में बीते पांच वर्षों से गुमनामी की जिंदगी जी रही पार्वती को आखिरकार अपना परिवार मिल गया. याददाश्त खो देने के कारण वह लंबे समय से अस्पताल में रह रही थी.

डीएम की पहल लाई खुशियां
जिला अधिकारी शशांक त्रिपाठी की पहल पर पार्वती का परिवार ढूंढा गया. महोबा जिले के कुल्पाहर तहसील के छितरवारा गांव से उसके पति विजय, पुत्री उपमा और बहन किरन उसे लेने जिला अस्पताल पहुंचे.

भावुक हुआ मिलन का पल
शुक्रवार को जब परिजनों ने अस्पताल में कदम रखा, वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। पार्वती ने अपनी बेटी और बहन को देखते ही गले से लगा लिया और उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े.

दुर्घटना ने छीनी थी याददाश्त
14 अक्टूबर 2019 को शाम पांच बजे पार्वती घायल अवस्था में रामाश्रम के पास मिली थी. पुलिस के अनुसार, वह ट्रेन से गिर गई थी और खुद को रेलवे लाइन के पास से किसी तरह घसीटकर लाई थी. चोटों के कारण उसकी याददाश्त चली गई थी.

अधिकारियों की मेहनत रंग लाई
तहसील नवाबगंज के एसडीएम विवेकशील और एडीएसआईओ प्रतिभा यादव ने मिलकर महोबा जिले तक खोजबीन शुरू की. वीडियो कॉल के जरिए जब पार्वती के परिवार ने उसे पहचाना, तो परिवार में खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अब पार्वती अपने घर लौट रही है, अपने जीवन की नई शुरुआत के लिए.

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