65 दिनों में 2000 का खर्च, 25 हजार की कमाई! जानें खेती का ये शानदार फॉर्मूला

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65 दिनों में 2000 का खर्च, 25 हजार की कमाई! जानें खेती का ये शानदार फॉर्मूला


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Cabbage Farming Tips : सिर्फ 65 दिन में तैयार होने वाली गोभी की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला बड़ा जरिया बन गई है. एक बीघा पर करीब 2000 रुपये की लागत लगती है और अच्छी पैदावार व बाजार भाव मिलने पर किसान 20–25 हजार रुपये तक कमा लेते हैं

लखीमपुर : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में इन दिनों सब्जी की खेती किसानों के लिए मजबूत आय का बड़ा जरिया बन चुकी है. सर्दियों की शुरुआत होते ही जिले के ग्रामीण इलाकों में गोभी, मटर, टमाटर, पालक और हरी मिर्च की खेती तेज़ी से बढ़ जाती है. मौसम ठंडा होने के साथ ही इन सब्जियों की मांग भी बाजार में तेजी से ऊपर जाती है, जिसका सीधा फायदा स्थानीय किसानों को मिलता है.

इन सभी में इस समय सबसे अधिक चर्चा और मांग गोभी की हो रही है. जिले के विभिन्न मंडियों जैसे लखीमपुर, गोला, निघासन और मितौली में गोभी की खपत लगातार बढ़ रही है. इससे न केवल किसानों के खेतों में रौनक है, बल्कि उनकी आय में भी अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.

मात्र 2000 होगा खर्च
बिजुआ ब्लॉक के किसान प्रदीप मौर्य बताते हैं कि उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से सब्जियों की खेती होती आ रही है, और यही खेती आज उनके परिवार की मुख्य आय का आधार है. प्रदीप इस मौसम में करीब चार बीघा जमीन में गोभी की उन्नत किस्मों की बुवाई कर रहे हैं.वह बताते हैं कि एक बीघा में गोभी तैयार करने का कुल खर्च करीब 2,000 रुपये आता है. इसमें बीज, जैविक/रासायनिक खाद, दवाई, सिंचाई और मजदूरी का पूरा खर्च शामिल है. प्रदीप कहते हैं कि सही समय पर पौध की रोपाई और सिंचाई कर दी जाए तो गोभी की फसल न केवल जल्दी तैयार होती है, बल्कि उत्पादन भी भरपूर मिलता है.

1 बीघा पर 25 हजार की कमाई
प्रदीप के अनुसार इन दिनों बाजार में गोभी की कीमत 20 से 40 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है. यदि मौसम अनुकूल रहे और बाजार में अधिक आपूर्ति न हो, तो दरें और ऊपर भी जा सकती हैं. एक बीघा में सामान्य रूप से 40–50 क्विंटल तक गोभी का उत्पादन हो जाता है. यानी औसत बाजार भाव पर भी किसान एक बीघा पर 20–25 हजार रुपये तक का लाभ आसानी से कमा सकते हैं.

तेजी से बढ़ रहा किसानों का रुझान
प्रदीप बताते हैं कि अब गांव के कई किसान पारंपरिक धान-गेहूं के चक्र से बाहर निकलकर सब्जी की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. सब्जियों में लागत कम, मुनाफा ज्यादा और फसल चक्र छोटा होने से किसान साल में दो से तीन बार उपज ले लेते हैं. इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है और उन्हें रोज़गार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता. यदि किसान ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, उन्नत किस्मों के बीज और संतुलित खादों का सही उपयोग करें तो गोभी की उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है.

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mritunjay baghel

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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