85 की उम्र, सुरों का जादू और जिंदगी से बेइंतिहा प्यार… बुजुर्ग की कहानी कर देगी इमोशनल

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85 की उम्र, सुरों का जादू और जिंदगी से बेइंतिहा प्यार… बुजुर्ग की कहानी कर देगी इमोशनल


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UP News: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में रहने वाले विजय नारायण की कहानी काफी भावुक करने वाली है. 85 साल की उम्र में भी उनका जज्बा कम नहीं है. वह पढ़े लिखे ज्यादा नहीं है, लेकिन प्रतिदिन हजारों लोगों को अपने सुरीले और उम्मीद के गीत से मनोरंजित करते हैं.

सुल्तानपुर: कभी-कभी जरूरतें और मजबूरियां लोगों को काम करने के लिए उम्र के बंधन में नहीं बांध पाती. एक ऐसी ही भावुक और प्रेरणादायक कहानी है उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में रहने वाले विजय नारायण की. उनकी उम्र लगभग 85 साल है. वह ज्यादा पढ़े-लिखे तो नहीं हैं लेकिन प्रतिदिन हजारों लोगों को अपने सुरीले और उम्मीद के गीत से मनोरंजित करते हैं. वे सुल्तानपुर शहर स्थित पर्यावरण पार्क में प्रतिदिन शाम को एक छोटा सा माइक और एक छोटा साउंड लेकर आते हैं… देशभक्ति और पुराने गानों से लोगों को मोहित करने की कोशिश करते हैं. आइए जानते हैं क्या है इनकी कहानी.

इतने वर्षों से गा रहे हैं गीत 
सुल्तानपुर शहर के गभड़िया मोहल्ले के रहने वाले विजय नारायण ने लोकल 18 से बात की. उन्होंने कहा पिछले 6 वर्षों से रोजाना गीत गा रहे हैं. वैसे तो गीत गाने का शौक इनका बचपन से रहा है लेकिन प्राइवेट नौकरी और पारिवारिक व्यवस्तता के कारण वे अपना अधिक समय गीत और संगीत की दुनिया में नहीं दे पाए. लेकिन अब इस 85 साल की उम्र में वे गीत गाकर ना सिर्फ खुद को बहलाते हैं बल्कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में आने वाले लोगों को भी गीत गाकर सुना रहे हैं.

यहां गाते हैं गीत 
विजय नारायण गोमती नदी के किनारे स्थित पर्यावरण पार्क में प्रतिदिन हाथों में एक छोटा सा माइक और एक छोटा सा साउंड लेकर आते हैं. इसके साथ ही उनके हाथों में एक पुरानी और मोटी डायरी होती है. इसमें देशभक्ति और पुराने गीत लिखे होते हैं इसके साथ ही उनकी बाग में एक नोटिस और अपील भी छुपी रहती है जिसमें लिखा होता है कि आप देशभक्ति और गाने का आनंद लें और यथासंभव जो हो सके उनका सहयोग भी करें.

पढ़े कम गढ़े ज्यादा 
विजय नारायण वैसे तो बहुत ज्यादा शैक्षिक डिग्री नहीं हासिल किए है. वह मात्र कक्षा 7 तक पढ़ाई किए हैं लेकिन वह गढ़ू ज्यादा हैं. यानी कि उनका अनुभव गीत और संगीत में काफी अच्छा रहा है. उन्होंने गीत किया कल कहीं से ना तो ट्रेनिंग लेकर सीखी है और ना ही किसी अन्य माध्यम से खुद गुनगुनाते थे और उसी से अब वह सुल्तानपुर में एक अच्छी पहचान कमा चुके हैं. ऐसे में बुढ़ापे में उनका एक सहारा गीत और संगीत है. उनके गीतों से प्रसन्न होकर लोग उनका कुछ आर्थिक सहयोग भी करते रहते हैं.

About the Author

काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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