सपा की नई चाल! पढ़ाई के बहाने सियासी बिसात पर बीजेपी को घेरा, 2027 के रण में ‘पाठशाला’ बनेगा सपा का ब्रह्मास्त्र?
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UP Politics: समाजवादी पार्टी की PDA पाठशाला को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने की योजना है. यह मुद्दा अब एक बड़ा राजनीतिक विषय बन गया है, जिसका उपयोग पार्टी भाजपा को घेरने के लिए…और पढ़ें
हाइलाइट्स
- PDA पाठशालाओं की शुरूआत से सपा ने तेज किया शिक्षा पर सियासी वार
- अखिलेश यादव इसे बना सकते हैं 2027 चुनावी मेनिफेस्टो का हिस्सा
- स्कूल मर्जर पर भाजपा को घेरने में जुटी समाजवादी पार्टी
समाजवादी पार्टी एक तरफ जहां तमाम मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को घेरने की रणनीति अपना रही है, वहीं दूसरी ओर वह 2027 में सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ काम कर रही है. इसी क्रम में “पाठशाला” के मुद्दे को लेकर भाजपा की घेराबंदी की जा रही है. पार्टी के कार्यकर्ता प्रदेशभर में न केवल PDA पाठशालाएं खोल रहे हैं, बल्कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं. वर्तमान में समाजवादी पार्टी ने 100 से अधिक स्थानों पर ऐसी पाठशालाएं शुरू कर दी है.
बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह आइडिया इतना पसंद आया है कि उन्होंने इसे आगामी चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने का मन बना लिया है. अब तक समाजवादी पार्टी शिक्षा को लेकर कई घोषणाएं कर चुकी है, लेकिन PDA पाठशाला का मुद्दा अब शिक्षा से भी बड़ा राजनीतिक संदेश देने वाला मुद्दा बन चुका है. पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि मौजूदा सरकार उनके वोट बैंक के साथ न्याय नहीं कर रही है और उनका हक छीना जा रहा है.
सपा सरकार पर हमलावर
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर हमलावर है. पार्टी भाजपा को संविधान विरोधी बताते हुए आरक्षण पर हमले का भी आरोप लगा रही है. पार्टी अब अपने पारंपरिक कैडर वोट के साथ-साथ दलित वोट बैंक को भी साधने की कोशिश में जुट गई है. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार शिक्षा देने से कतरा रही है. इस पूरे मुद्दे पर पार्टी बेहद मुखर दिखाई दे रही है.
भाजपा के लिए नुकसानदेह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्कूलों को मर्जर करने का निर्णय भाजपा की राजनीतिक भूल साबित होगी? समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को तेज़ी से आगे बढ़ा रही है और इससे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश भी कर रही है.

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. डिजिटल में 6 साल से ज्यादा का अन…और पढ़ें
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