Agra News: बुढ़ापे में टूटी हड्डी? अब घबराएं नहीं, आगरा के इस अस्पताल में मिल रहा मुफ्त और आधुनिक इलाज!

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Agra News: बुढ़ापे में टूटी हड्डी? अब घबराएं नहीं, आगरा के इस अस्पताल में मिल रहा मुफ्त और आधुनिक इलाज!


आदित्य मुदगल/आगरा: बुजुर्गों की हड्डी टूटने पर अक्सर लोग कहते हैं – “अब क्या होगा, बुजुर्ग चल-फिर नहीं पाएंगे.” यही वजह है कि कई बार परिजन ऑपरेशन कराने से भी डरते हैं. लेकिन आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है. यहां अब बुजुर्गों की टूटी हड्डियों का न सिर्फ इलाज किया जा रहा है बल्कि 100 साल से ज्यादा उम्र के मरीज भी ऑपरेशन के बाद फिर से सामान्य जीवन जी रहे हैं. हाल ही में कॉलेज में 105 साल के बुजुर्ग का सफल ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद वे बिना किसी दिक्कत के चल-फिर पा रहे हैं.

निशुल्क मिलेगा इलाज
एसएन मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग में बुजुर्ग मरीजों के लिए निशुल्क इलाज उपलब्ध है. पहले जहां हड्डी टूटने पर परिजन मरीजों को दिल्ली, जयपुर जैसे बड़े शहरों में ले जाते थे, वहीं अब यह सुविधा आगरा में ही मिल रही है.

डरते थे परिजन, लेकिन मिला जीवनदान
इस ऑपरेशन से जुड़ी कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है. डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि शुरुआत में 105 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के परिजन ऑपरेशन से डर रहे थे. उन्हें चिंता थी कि कहीं ऑपरेशन के दौरान मरीज की हालत और न बिगड़ जाए. लेकिन असहनीय दर्द के कारण जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी. परिजनों ने हिम्मत दिखाई और नतीजा यह रहा कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हुआ. बुजुर्ग अब पहले की तरह चल-फिर रहे हैं.

क्यों टूटती है बुजुर्गों की हड्डी?
डॉ. अमृत गोयल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में आने वाले अधिकतर बुजुर्ग गिरने की वजह से हड्डी टूटने की समस्या झेलते हैं. कई बार अचानक चक्कर आने, शौचालय में फिसलने या सड़क पर गिरने से उनकी हड्डियां टूट जाती हैं. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और खासकर कूल्हे की हड्डी जल्दी प्रभावित होती है. कूल्हे की हड्डी टूट जाने पर व्यक्ति चल नहीं पाता और भयानक दर्द सहना पड़ता है. ऐसे में सही इलाज और समय पर ऑपरेशन ही राहत दे सकता है.

समय पर इलाज क्यों है जरूरी
डॉ. गोयल ने बताया कि पहले लोग बुजुर्गों की टूटी हड्डी का इलाज कराने से कतराते थे और उन्हें महीनों तक बिस्तर पर लिटाए रखते थे. इससे खून का बहाव प्रभावित होता था और शरीर में कई गंभीर बीमारियां पनपने लगती थीं. लंबे समय तक बिस्तर पर रहने से मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं, जिससे दर्द और बढ़ जाता है.

लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. आधुनिक तकनीक की मदद से बेहद छोटे चीरे से प्लेट और रोड डालकर फैक्चर को फिक्स कर दिया जाता है. बेहोशी की तकनीक भी पहले से काफी सुरक्षित हो गई है, जिससे हाई रिस्क मरीजों का भी सफल ऑपरेशन किया जा सकता है.

अन्य सफल ऑपरेशन भी कर चुके हैं डॉक्टर
डॉ. गोयल और उनकी टीम ने अब तक 60 साल से अधिक उम्र के कई मरीजों का सफल ऑपरेशन किया है. हाल ही में 95 वर्षीय बुजुर्ग का भी हड्डी जोड़ने का ऑपरेशन किया गया था, जिसके बाद वे पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं. 105 वर्षीय बुजुर्ग भी अब अस्पताल आते हैं और उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं है.
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हार न मानें, हर उम्र में संभव है इलाज
डॉ. अमृत गोयल का कहना है कि हड्डी टूटना किसी भी उम्र में “End of Life Event” यानी जीवन का अंत मानने की गलती नहीं करनी चाहिए. समय रहते सही इलाज कराया जाए तो बुजुर्ग भी पूरी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं. उन्होंने अपील की कि किसी भी उम्र में फ्रैक्चर को नजरअंदाज न करें और आधुनिक चिकित्सा का सहारा लें.



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