Ghazipur News: कचरे में दबा गाजीपुर का ये ऐतिहासिक पोखरा, अब बनेगा वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट स्पॉट

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Ghazipur News: कचरे में दबा गाजीपुर का ये ऐतिहासिक पोखरा, अब बनेगा वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट स्पॉट


गाजीपुर: गाजीपुर के तिलक नगर में एक ऐसा स्थल है जो सदियों से लोगों की नजरों में है, लेकिन समय के साथ इसकी चमक थोड़ी फीकी पड़ गई. यह है “पहाड़ खान का पोखरा”, जिसे मुगल बादशाह अकबर ने अपने सेनापति पहाड़ खान को बनाने का जिम्मा दिया था. कहते हैं कि इसी पोखरे के किनारे त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता भी आए थे और केवट प्रसंग से जुड़ी कथाएं आज भी लोगों की यादों में जीवित हैं. लेकिन अब यह जगह गंदगी और कचरे से भरी हुई है और दूषित पानी के कारण आसपास के लोगों के लिए बीमारियों का कारण बन रही है.

अब प्रशासन इसे मॉडल वाटर साइट और पर्यटन स्थल के रूप में पुनर्जीवित करने की योजना बना रहा है, ताकि इतिहास, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ उभर सके.

अकबर काल से जुड़ी ऐतिहासिक पहचान
लोककथाओं और इतिहास दोनों के अनुसार, मुगल बादशाह अकबर ने इस क्षेत्र का प्रशासन अपने भरोसेमंद सेनापति पहाड़ खान को सौंपा था. पहाड़ खान ने इस विशाल पोखरे का निर्माण कराया और इसे एक महत्वपूर्ण जलस्रोत के रूप में विकसित किया. यह स्थल न केवल पानी का स्रोत रहा, बल्कि गाजीपुर क्षेत्र के प्रशासन और सुरक्षा में भी इसकी अहम भूमिका रही.

धार्मिक मान्यता और लोककथाएं
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम और माता सीता भी यहां आए थे. इसके अलावा “केवट प्रसंग” से जुड़ी कथाएं भी इसी इलाके से जुड़ी मानी जाती हैं. यही वजह है कि यह पोखरा धार्मिक आस्था और इतिहास का अनोखा संगम बन चुका है.

गंदगी से बदहाल, अब बनेगा मॉडल वाटर साइट
पहाड़ खान का पोखरा कभी जिले की शान हुआ करता था, लेकिन अब यह गंदगी और कचरे का अड्डा बन चुका है. दूषित पानी से बीमारियां फैल रही हैं और दुर्गंध के कारण स्थानीय लोग परेशान हैं. प्रशासन ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए 4.91 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है. योजना के तहत पोखरे को पर्यटक स्थल और धार्मिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि यह क्षेत्र का आकर्षक स्थल बन सके और स्थानीय लोगों के लिए भी लाभदायक हो.

“विरासत को बचाना जरूरी” – प्रो. संजय यादव
सहजानंद कॉलेज के इतिहास विभाग के प्रो. संजय यादव कहते हैं, “पहाड़ खान का पोखरा सिर्फ जलस्रोत नहीं है, बल्कि गाजीपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी है. यहां मुगलकालीन स्थापत्य और लोकमान्यताओं का अनोखा संगम दिखता है. अगर इसे पुनर्जीवित किया गया तो यह शिक्षा, पर्यटन और आस्था का केंद्र बन सकता है.”

पहाड़ खान गाजीपुर के इतिहास में एक अहम शख्सियत
पहाड़ खान गाजीपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण शख्सियत थे, जिनका नाम स्थानीय प्रशासन और जलस्रोतों से जुड़ा हुआ है. गाजीपुर क्षेत्र पर कई शासकों का शासन रहा, जिसमें दिल्ली सल्तनत, तुगलक वंश और मुगल साम्राज्य शामिल हैं. पहाड़ खान उस समय के प्रभावशाली फौजदार या स्थानीय प्रशासक थे, जिनके नाम पर आज भी “पहाड़ खान का पोखरा” प्रसिद्ध है.
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इतिहास के अनुसार, मुगल बादशाह अकबर के समय इस क्षेत्र का प्रशासन अफगान अली कुली खान और मुहम्मद खान नूहानी जैसे शासकों ने संभाला था. पहाड़ खान ने गाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों के प्रशासन और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण उनका नाम आज भी यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के रूप में जीवित है.



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