2022 वाली गलती सुधारने जा रहे अखिलेश, दादरी से पश्चिमी यूपी को साधने की कवायद
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Akhilesh Yadav News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में जाकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि 2027 के चुनाव में उनकी पार्टी कैसे जनता की सरकार बनाएगी. समाजवादी पार्टी जातीय पंचायत भी कर रही है.
लखनऊः पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गौतम बुद्ध नगर के दादरी में आखिर क्या प्लानिंग कर रहे हैं ? 8 या 9 नवंबर को दादरी में आयोजित होने वाले महा गुर्जर सम्मेलन के जरिए से क्या अखिलेश यादव पश्चिम उत्तर प्रदेश में होने वाले सियासी नुकसान की भरपाई की योजना बना रहे हैं. एक-एक गांव में जाकर अपने कार्यकर्ताओं को जगाने की कोशिश कर रहे अखिलेश यादव का लक्ष्य है कि दादरी में कम से कम 5 लाख कार्यकर्ताओं को जुटाया जाए. इस लक्ष्य को अखिलेश यादव कितना पूरा कर पाएंगे. साथ ही क्या जातियों में बंटे हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी गुर्जर बिरादरी पर अपना दावा ठोक पाएगी.
इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने के लिए समाजवादी पार्टी का बड़ा खेमा वहां सक्रिय नजर आ रहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में जाकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि 2027 के चुनाव में उनकी पार्टी कैसे जनता की सरकार बनाएगी. समाजवादी पार्टी जातीय पंचायत भी कर रही है. साथ ही लोगों में उभरे गुस्से को भी अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि दादरी में होने वाली सपा की महा रैली को सफल बनवाया जाए ,हालांकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अभी कोई कंफर्म डेट नहीं तय की है. लेकिन यह माना जा रहा है कि 8 या 9 नवंबर को दादरी में समाजवादी पार्टी पश्चिम उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी रैली करने जा रही है.
जाटव वोट पर भी समाजवादी पार्टी की नजर
इस रैली के माध्यम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाले सियासी नुकसान को समाजवादी पार्टी भरने की कोशिश करेगी. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी समीकरण क्योंकि एनडीए के पक्ष में दिखाई देता है. ऐसे में समाजवादी पार्टी गुर्जर जाति को अपने साथ जोड़कर खुद के समीकरण को और ज्यादा बेहतर करना चाहती है यही नहीं जाटव पर भी समाजवादी पार्टी की नजर है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ताकत बटोरेंगे अखिलेश
समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव के नजदीक आने पर दलितों के वोट के लिए कोई सियासी समझौता भी कर सकती है, जिससे मुस्लिम, जाटव और गुर्जर का एक समीकरण बनाया जा सके. हालांकि चुनाव में समीकरण कितना कारगर होगा यह तो वक्त बताएगा. लेकिन पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश की अपेक्षाकृत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कमजोर दिखाई दे रही समाजवादी पार्टी नई जातियों को अपने साथ जोड़ करके 2027 के चुनावी समर को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है.

Prashant Rai is a seasoned journalist with over seven years of extensive experience in the media industry. Having honed his skills at some of the most respected news outlets, including ETV Bharat, Amar Ujala, a…और पढ़ें
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