Barabanki News: देवा मेला 2025, रब और राम के संदेश संग सूफियाना रंग में रंगा बाराबंकी, मेले में क्या है खास जानें
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Deva Mela 2025: सूफी संत हाजी वारिस अली शाह के पिता सैय्यद कुर्बान अली शाह की याद में लगने वाला प्रसिद्ध देवा मेला इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया. जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी की पत्नी शैलजा त्रिपाठी ने शेख मोहम्मद हसन गेट पर फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया. प्रेम, सद्भाव और धार्मिक एकता का प्रतीक यह मेला अगले दस दिनों तक चलेगा.
बाराबंकी. उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के देवा थानाक्षेत्र में हर वर्ष लगने वाला देवा मेला देशभर में सूफियाना परंपरा, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है. इस बार भी इसका शुभारंभ पारंपरिक विधि से हुआ. जिलाधिकारी की पत्नी शैलजा त्रिपाठी ने एजाज रसूल गेट पर फीता काटा और शांति के प्रतीक सफेद कबूतर उड़ाकर मेले की शुरुआत की. उद्घाटन समारोह में भारी भीड़ रही, लोगों ने “जो रब है वही राम” का संदेश दोहराया. देवा मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि संत हाजी वारिस अली शाह के अपने पिता सैय्यद कुर्बान अली शाह के प्रति सम्मान और भक्ति की ऐतिहासिक मिसाल भी है. यह परंपरा लगभग एक सदी से बिना रुके जारी है. इस दौरान देश और विदेश से लाखों जायरीन यहां पहुंचकर दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं और अमन-चैन की दुआ मांगते हैं.
सूफियाना रंग में रंगा रहेगा देवा मेला परिसर
मेले के दस दिनों तक पूरा परिसर सूफियाना माहौल से सराबोर रहेगा. बड़े पंडालों में देश के नामी फनकार अपने कलाम और कव्वालियां पेश करेंगे. कार्यक्रमों में सूफी संगीत, कव्वाली, मशहूर शायरों की नज़्में और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी. उद्घाटन के बाद कार्यक्रमों की शुरुआत भी कर दी गई है. उद्घाटन के बाद जिलाधिकारी की पत्नी शैलजा त्रिपाठी ने कहा कि इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन कर वह गर्व महसूस कर रही हैं. उन्होंने कहा कि इस वर्ष मेले की थीम “जो रब है वही राम” के साथ “विरासत और विकास” को भी प्रमुखता दी गई है, जो धार्मिक सौहार्द के साथ-साथ सामाजिक प्रगति का भी प्रतीक है.
प्रशासन की तैयारियां पूरी, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
बाराबंकी के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए पूरी व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि देवा मेला बाराबंकी की पहचान है और उम्मीद है कि यह आयोजन अपनी बुलंदियों को छुएगा. मेले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि जायरीन बेखौफ होकर धार्मिक आस्था में डूब सकें. देवा मेला 2025 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब आज भी जीवित है. सूफी संतों की यह धरती रब और राम के संदेश के साथ प्रेम, एकता और इंसानियत का अनोखा संगम पेश कर रही है. अगले दस दिनों तक बाराबंकी सूफियाना रंग में डूबा रहेगा.