चित्रकूट में स्वच्छ भारत मिशन की पोल खुली, बंद पड़े शौचालय, जानें वजह
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Chitrakoot News: चित्रकूट जिले के मानिकपुर विकास खंड के कई गांवों में सामुदायिक शौचालय तो बने, लेकिन वे अब उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं. गांव की रहने वाली मनिया, मुलई और अन्य महिलाओं ने बताया कि जब शौचालय बना था. कुछ दिन खुला रहा है. लेकिन पिछले चार-पांच महीनों से लगातार बंद है.
यूपी सरकार जहां एक ओर स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव सामुदायिक शौचालय बनवाकर लोगों को खुले में शौच से मुक्त कराने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत उनके दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. चित्रकूट जिले के मानिकपुर विकास खंड के कई गांवों में सामुदायिक शौचालय तो बने, लेकिन वे अब उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं.
सामुदायिक शौचालय में ताला
आज लोकल 18 की टीम ने जब मानिकपुर ब्लॉक के कीहुनियां गांव का रुख किया, तो वहां का सामुदायिक शौचालय बंद पड़ा मिला. शौचालय के गेट पर महीनों से ताला लटक रहा था. गांव की रहने वाली मनिया, मुलई और अन्य महिलाओं ने बताया कि जब शौचालय बना था. कुछ दिन खुला रहा है. लेकिन पिछले चार-पांच महीनों से लगातार बंद है. हम महिलाओं को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है.महिलाओं ने बताया कि खुले में शौच जाने के दौरान उन्हें शर्मिंदगी और सुरक्षा की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं. रास्ते से लोगों का आना-जाना लगा रहता है और बारिश के मौसम में कीड़े-मकोड़े काटने का डर बना रहता है,उन्होंने प्रशासन से जल्द शौचालय खुलवाने की मांग की ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े.
खंडहर में तब्दील शौचालय
इसके बाद टीम ने डोडामाफी गांव का भी दौरा किया. वहां की स्थिति और भी बदतर मिली. यहां बना सामुदायिक शौचालय खंडहर में तब्दील हो चुका था दरवाजे टूटे हुए,दीवारों पर हल्की दरारें और अंदर गंदगी का अंबार लगा हुआ था. गांव की लड़कियों ने बताया कि यहां न दरवाजे हैं, न साफ-सफाई मजबूरी में हमें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है. अगर शौचालय ठीक रहता तो हमें बाहर क्यों जाना पड़ता. आज के समय को देखते हुए हम लोगो को खुद बाहर शौच क्रिया को जाने में डर लगता है.अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर हर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय बनवाए, तो वे उपयोग में क्यों नहीं हैं? क्या यह ग्राम प्रधानों और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, या फिर योजनाओं के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति?