Farming Tips: किसान आलू के इन उन्नत किस्म का करें चयन, रोग मुक्त होगी फसल, बढ़ेगी पैदावार और बंपर होगा मुनाफा

0
Farming Tips: किसान आलू के इन उन्नत किस्म का करें चयन, रोग मुक्त होगी फसल, बढ़ेगी पैदावार और बंपर होगा मुनाफा


potato cultivation: फर्रुखाबाद को आलू उत्पादन में विशेष पहचान मिली है. यहां के किसान अधिक लागत लगाकर खेती करते हैं, लेकिन अच्छी किस्म के बीज न मिलने से कई बार फसल उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती. अब किसानों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि फर्रुखाबाद समेत प्रदेश के किसान यहां से उन्नत और रोग-प्रतिरोधक बीज प्राप्त कर सकेंगे. इन बीजों से तैयार आलू की फसल जल्दी पकती है और किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं.

लोकल18 से बातचीत में ध्रुव सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने खुद की पूंजी से इस कारोबार को शुरू किया. फर्रुखाबाद जिले के विकास खंड शमसाबाद के नगला सेठ निवासी किसान वैज्ञानिक पद्धति से आलू की खेती और बीज उत्पादन कर रहे है. इस तकनीक से तैयार बीज रोग-मुक्त होते हैं और फसल बंपर होती है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस पद्धति से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.

आलू उत्पादन के लिए किसानों को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. ध्रुव सिंह राजपूत के अनुसार, जब तक मौसम में नमी की आर्द्रता कम है, तब तक खेतों में आलू की बुआई नहीं करनी चाहिए. पहले खेतों को जैविक उर्वरक से तैयार करें. आलू के बीजों का उपचार करें ताकि आलू का जमाव सही हो सके. जिन बीजों का किसान कई बार उत्पादन कर चुके है, उन्हें बदलकर लैब से तैयार बीज लें. इस समय उनके पास कई प्रकार के उन्नत बीज उपलब्ध है. जिन्हें किसान उगा सकते है.

आलू की खेती के लिए मौसम बहुत अहम है. इसकी बुवाई 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर की जाती है. आलू एक कंद वाली फसल है, इसलिए इसके लिए पर्याप्त नमी और धूप दोनों जरूरी है. सही जलवायु और संतुलित मौसम आलू की पैदावार को सीधे प्रभावित करते है.

फर्रुखाबाद में किसानों को अब विभिन्न उन्नत किस्मों के आलू के बीज आसानी से मिल सकेंगे. इनमें फुलवा आलू, पुखराज, ख्याति, हॉलैंड, चिप्सोना 1, रॉयल ब्लू, कुफरी बहार, कुफरी जमुनी, कुफरी उदय, प्रिया, कुफरी लोहे, RRR 6, तेजस, थार 1, 2, 3 जी 5, प्राई M, कुफरी संगम, कुफरी कंचन, पुखराज, नीलकंठ, हॉलैंड, चिप्सोना, बादशाह, कुफरी सिंदूरी और कुफरी देवा जैसी किस्में शामिल है. ये किस्में अधिक उत्पादन के साथ ही बेहतर गुणवत्ता भी देती हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि आलू की फसल में सही समय पर बोआई, संतुलित मात्रा में उर्वरक, कीटनाशक और जल प्रबंधन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है बल्कि फसल की उपज भी बढ़ जाती है.

आलू की खेती के लिए सबसे पहले समतल भूमि को तैयार कर उसमें जैविक खाद मिलाई जाती है. इसके बाद मशीनों की मदद से आलू के बीज बोए जाते है. समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से फसल अच्छी तरह बढ़ती है. पकने पर आलू की खुदाई कर किसान उसे शीतगृह या सीधे बाजार में बिक्री के लिए भेज देते है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *