मां से सीखा हुनर… फिर घर पर शुरू किया यह काम, आज तगड़ी हो रही कमाई, कई जिलों में है डिमांड
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Success Story: सुल्तानपुर की ऊषा सिंह ने मूंज के प्रोडक्ट्स बनाना मां से सीखा. फिर सरकारी योजनाओं से इसका बिजनेस शुरू किया. आज वह इस काम से 50 प्रतिशत मुनाफा कमाती हैं. उनके प्रोडक्ट की कई जिलों में डिमांड है.
Success Story: अगर कुछ सीखने और करने का जुनून हो तो न तो उम्र बीच में बाधा बनती है और न ही संसाधनों का अभाव. कुछ ऐसा ही कर दिखाया उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली एक महिला ने, जिन्होंने मूंज के प्रोडक्ट बनाने का काम अपने पुरखों से सीखा और वह सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर अब खुद का बिजनेस कर रही है और महीने में हजारों रुपए की कमाई भी कर रही हैं. ऐसे में उनको देखकर अन्य महिलाएं भी अपना प्रेरणा स्रोत मानती हैं तो आईए जानते हैं क्या है इनकी कहानी…
लोकल 18 से बातचीत के दौरान धनपतगंज ब्लाक की रहने वाली ऊषा सिंह ने बताया कि मूंज के प्रोडक्ट्स में वे सिकहुला, भउका,दौरी, डोलची और कप जैसी कलाकृति बनाती हैं. जिसमें सिकहुला और भउका का प्रयोग अनाज को नापने के लिए किया जाता है. डोलची का प्रयोग पुष्प आदि के रखने के काम में किया जाता है.
मां से सीखा यह हुनर
ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की ऊषा देवी ने बताया कि उन्होंने अपने अंदर विकसित इस हुनर को अपनी मां से सीखा था. उनकी मां भी मूंज के उत्पाद बनाने का काम करती थी. ऊषा को बचपन में ही मूंज के उत्पाद बनाने का पारिवारिक माहौल मिला और इसी की बदौलत ऊषा आज विभिन्न प्रकार के मूंज प्रोडक्ट्स बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं.
इतना होता है मुनाफा
वैसे तो मूंज के अलग-अलग उत्पाद के अलग-अलग दाम हैं, लेकिन अगर हम मूंज के उत्पादों में शुद्ध लाभ प्रतिशत की बात करें तो 50% प्रत्येक प्रोडक्ट्स में लाभ होता है. ऊषा ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि हम कच्चा माल सर्दी के मौसम में गांव से ही खरीद लेते हैं, जिससे हमको सस्ता मिल जाता है. उन्होंने बताया कि यदि किसी प्रोडक्ट को बनाने में₹100 लागत आती है, तो वह डेढ़ सौ रुपए में एक प्रोडक्ट को बेचती हैं.
कई जिलों में होती है सप्लाई
ऊषा सिंह ने बताया कि उनके इस मूंज के प्रोडक्ट को बनाने और बिक्री करने में जिला उद्योग कार्यालय में कार्यरत जिला उपायुक्त नेहा सिंह द्वारा काफी सपोर्ट मिलता है. जिसके चलते वे सुल्तानपुर समेत आसपास के जिलों में भेजती हैं.
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों …और पढ़ें
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में नई दुनिया अखबार से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों … और पढ़ें