Sultanpur News: पारिवारिक परंपरा को बना लिया व्‍यवसाय, अब त्‍योहारों में ही नहीं पूरे साल होती है कमाई, जानें बसंत की कहानी

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Sultanpur News: पारिवारिक परंपरा को बना लिया व्‍यवसाय, अब त्‍योहारों में ही नहीं पूरे साल होती है कमाई, जानें बसंत की कहानी


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Inspiring Story : बसंत लाल प्रजापति ने बताया कि मिट्टी के बर्तन, दियाली, कोसा आदि बनाने का उनका यह कार्य उनको अपने पारिवारिक विरासत के रूप में मिला है और इस पारिवारिक परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप दिया, आज इसी व्यवसाय से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में लगे हुए हैं.

सुल्‍तानपुर : प्राचीन काल से ही भारत में कर्म के आधार पर लोगों ने उसे अपना पारिवारिक काम बना लिया. धीरे-धीरे मध्यकाल और आधुनिक काल तक पहुंचते-पहुंचते उस काम को करने वाली कई पीढ़ियां उस कला को हस्तांतरित करती चली गईं और पुनर्जागरण के बाद जब तकनीकी युग आया तब लोगों ने अपने-अपने काम में टेक्नोलॉजी को शामिल किया और उससे अच्छी कमाई करने लगे. इसी तरह है सुल्तानपुर के रहने वाले बसंत लाल प्रजापति जो मिट्टी के बर्तन, सजावटी सामानों आदि बनाकर पिछले 30 सालों से अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं ऐसे में आइए जानते हैं क्या है बसंत लाल प्रजापति की कहानी.
संजोए रखा है पारंपरिक व्यवसाय
लोकल 18 से बसंत लाल प्रजापति ने बताया कि मिट्टी के बर्तन, दियाली, कोसा आदि बनाने का उनका यह कार्य उनको अपने पारिवारिक विरासत के रूप में मिला है और इस पारिवारिक परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप दिया. और आज इसी व्यवसाय से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में लगे हुए हैं. आपको बता दें कि बसंत पिछले 30 वर्षों से मिट्टी का काम कर रहे हैं.
साल भर करते हैं काम
मिट्टी का काम करने वाले ज्यादातर कुम्हार दीपावली और अन्य त्योहार को मद्देनजर रखते हुए मिट्टी के बर्तनों और दियाली का उत्पादन करते हैं लेकिन पल्टन बाजार, सुल्तानपुर के रहने वाले बसंत अपने इस व्यवसाय को साल भर करते हैं ताकि उनको त्योहार पर मांग की गई दियाली आदि की आपूर्ति करने में कोई समस्या न हो.
इन चुनौतियों का करना पड़ता है सामना 
बसंत बताते हैं कि उनके इस व्यवसाय में सबसे बड़ी चुनौती मिट्टी का ना मिलना है क्योंकि बसंत के पास जमीन का अभाव है. मिट्टी के लिए किसी भी तरह का सरकारी पट्टा न मिलने और लोगों द्वारा मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कम करने की वजह से बसंत को इस पारंपरिक व्यवसाय में काफी चुनौतियां आ रही हैं.
होती है इतनी कमाई 
बसंत प्रजापति ने बताया कि उनके इस मिट्टी के बर्तन व्यापार में प्रतिमाह हजारों रुपए की कमाई होती है. जिससे वे अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं. वहीं अगर दियाली के दाम की बात की जाय तो 100 रुपए प्रति सैकड़ा के हिसाब से बाजार में बेचते हैं.

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पारिवारिक परंपरा को बना लिया व्‍यवसाय, अब पूरे साल होती है कमाई



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