Agra News: सालों पहले जब बैंक लॉकर नहीं थे, तब भी रईसों का खजाना रहता था सेफ, जानें कैसे होता था ये कमाल!

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Agra News: सालों पहले जब बैंक लॉकर नहीं थे, तब भी रईसों का खजाना रहता था सेफ, जानें कैसे होता था ये कमाल!


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Agra Latest News: उत्तर प्रदेश के आगरा में 60-70 साल पहले जमींदार और रईस अपने आभूषण और कीमती सामान को बैंक में विशेष संन्दुक में जमा कर सुरक्षित रखते थे. इस संन्दुक पर विशेष मोहर लगती थी, जिसे धनी परिवारों के सदस्य स्वयं बनवाते और इस्तेमाल करते थे.

आगरा: उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी आगरा में पुराने जमाने की बैंकिंग परंपराओं की एक अनोखी कहानी आज भी लोगों के लिए रोचक है. 60-70 साल पहले जमींदार और रईस लोग अपने कीमती आभूषण और अन्य मूल्यवान सामान सुरक्षित रखने के लिए विशेष तरीके अपनाते थे. उस दौर में बैंक में लॉकर जैसी आधुनिक सुविधा नहीं थी, लेकिन धनी लोग अपनी सुरक्षा के लिए बेहद सावधानी रखते थे.

आगरा निवासी राज किशोर शर्मा ने बताया कि उनका परिवार जमींदारों में गिना जाता था और उनके बाबा ब्रिटिशकाल में राय साहब की उपाधि प्राप्त थे. ऐसे में उनका परिवार अपने कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए बैंक का सहारा लेता था. राज किशोर ने बताया कि करीब 60 साल पहले उनके पिताजी बैंक में आभूषण रखने जाते थे.

संदूक में रखा जाता था सामान
उस समय बैंक में कीमती सामान रखने के लिए एक लोहे का संन्दूक खरीदा जाता था. जिसके अंदर सभी आभूषण और मूल्यवान वस्तुएं रखी जाती थीं. इसके बाद संदूक पर बैंक और ग्राहक दोनों की मोहर लगाई जाती थी. इसके ऊपर पतली तुर्पण चढ़ाकर संदूक पैक किया जाता और फिर बैंक में जमा किया जाता था.

राज किशोर शर्मा ने बताया कि शहर के धनी, जमींदार और रईस अपनी स्पेशल मोहर बनवाते थे और वही मोहर संदूक पर लगाते थे. उनके बाबा के पास दो अद्धभुत मोहरे थीं. पहली मोहर एक अंगूठी थी, जिस पर उनका नाम खुदा हुआ था, जबकि दूसरी मोहर आधी पीतल और आधी लकड़ी की बनी थी. ऐसी मोहरे उस समय सिर्फ जमींदार और रईस के पास होती थीं.

60 साल पहले बैंक में आभूषण सुरक्षित रखने का तरीका
राज किशोर ने बताया कि 60-70 साल पहले बैंक में लॉकर की सुविधा नहीं थी. इसलिए लोग अपना संदूक खुद पैक करके बैंक में जमा करते थे. बैंक के अधिकारी रजिस्टर में सभी एंट्री करते थे, क्योंकि उस समय कंप्यूटर नहीं था. शहर के लगभग सभी धन्ना सेठ अपना कीमती सामान इसी तरह संदूक में पैक कर बैंक में सुरक्षित रखते थे.

धन्ना सेठ और जमींदारों की स्पेशल मोहरें
राज किशोर ने बताया कि संदूक को बैंक में जमा करने के बाद बैंक की ओर से एक मोहर लगती थी. इसके अलावा, जमींदार और रईस अपनी अलग स्पेशल मोहर भी रखते थे. यह मोहर उनकी पहचान और सुरक्षा का प्रतीक होती थी. उनके बाबा नन्द किशोर शर्मा भी ऐसी मोहर रखते थे, जिसका इस्तेमाल बैंक में आभूषण जमा करने के दौरान किया जाता था. आज भी राज किशोर ने अपने बाबा की यह अद्धभुत मोहरे सेफ रखी हुई हैं.

इस प्रकार आगरा में पुराने समय में बैंकिंग और सुरक्षा के अनोखे तरीके और जमींदारों की परंपरा आज भी लोगों के लिए इतिहास का जीवंत हिस्सा बने हुए हैं.

Seema Nath

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें

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