लखनऊ में घर का सपना होगा पूरा, सौमित्र विहार योजना के लिए रजिस्ट्रेशन जल्द
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आवासीय सुविधाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश आवास-विकास परिषद एक नई योजना लेकर आ रहा है. सौमित्र विहार नामक इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पंजीकरण नवंबर 2025 में होने जा रहा है, जिसमें पहले चरण में करीब 2000 आवासीय प्लॉट उपलब्ध होंगे. यह योजना न केवल आम नागरिकों के लिए किफायती आवास का विकल्प साबित होगी, बल्कि स्थानीय किसानों को भी लैंड पूलिंग के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाएगी.
योजना को आठ अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम हैं- संकल्प, संकेत, संज्ञान, संचित, संभव, सबोध, संबित और संदीप. प्रत्येक खंड में आधुनिक सुविधाओं जैसे पार्क, कन्वेंशन सेंटर, झीलें और खेल मैदान शामिल होंगे. इसके अलावा, आवासीय प्लॉटों के बीच कमर्शियल और शैक्षणिक क्षेत्र भी विकसित किए जाएंगे, जो इसे एक पूर्ण टाउनशिप का रूप देंगे.
प्लॉटों का आकार, कीमत और पात्रता
यह योजना विभिन्न आय वर्गों के लोगों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है. उपलब्ध प्लॉटों का आकार 30 वर्ग मीटर से लेकर 300 वर्ग मीटर तक होगा, जिसमें: ईडब्ल्यूएस (निम्न आय वर्ग) 30 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट, एमआईजी (मध्यम आय वर्ग) 65 वर्ग मीटर के प्लॉट और एलआईजी (उच्च आय वर्ग) बड़े आकार के प्लाट होंगे. प्लॉटों की अनुमानित कीमत 2200 से 2700 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच तय होने की संभावना है, जो लखनऊ के बाजार दरों से काफी किफायती है. आवेदन के लिए न्यूनतम पात्रता मानदंडों में उत्तर प्रदेश का निवासी होना, आय प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज शामिल हैं. रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा, और चयनित आवेदकों को लॉटरी के बाद पजेशन लेटर जारी होगा.
किसानों के लिए विशेष लाभ
सौमित्र विहार योजना लखनऊ की पहली ऐसी परियोजना है, जिसमें लैंड पूलिंग का मॉडल अपनाया गया है. इसके तहत चांद सराय, कासिमपुर बिरुहा, हबुआपुर, मोअज्जम नगर, सठवारा, सिद्धपुरा, भटवारा, पहाड़नगर टिकरिया, कबीरपुर, मगहुआ और बेली जैसे गांवों के किसानों से जमीन ली गई है. बदले में, उन्हें विकसित प्लॉटों का 25 प्रतिशत हिस्सा (लगभग 50 वर्ग मीटर आकार का) मिलेगा. यह न केवल किसानों को 5 गुना तक का आर्थिक लाभ देगा, बल्कि ग्रामीण-शहरी एकीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा. विभाग के अपर आयुक्त नीरज शुक्ला ने बताया कि इस मॉडल से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी.