स तरीके से करें कद्दू की खेती, कम लागत में कमाएं लाखों का मुनाफा
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Agriculture News: वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह लोकल 18 से कहा कि कद्दू की फसल किसानों के लिए बेहद मुनाफे वाली फसल है. इसकी खेती करके वह अपनी कमाई दोगुनी कर सकते हैं. यह एक ऐसी फसल है जिसमें लागत शून्य मात्र है. कमाई लाखों में बस खेती के लिए सही समय और तकनीक से की गई कद्दू की खेती किसानों के लिए आय का स्थायी और लाभकारी स्रोत बन सकती है.
कद्दू की खेती भारत के अधिकांश हिस्सों में की जाती है. यह किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है. यह सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर होती है. साल भर बजार में इसकी मांग बनी रहती है. कद्दू की खेती को सही समय, मिट्टी और देखभाल के साथ किया जाए तो उत्पादन और मुनाफा दोनों अच्छे मिलते हैं.
कब करें बुवाई
कद्दू की बुवाई का समय प्रदेश और मौसम पर निर्भर करता है.सामान्यतः गर्मी की फसल के लिए फरवरी से मार्च तक बुवाई की जाती है, जबकि बरसात की फसल के लिए जून से जुलाई महीना उपयुक्त माना जाता है. कुछ क्षेत्रों में किसान अक्टूबर-नवंबर में भी इसकी बुवाई करते हैं.बीज की बुवाई हमेशा अच्छी धूप वाली जगह पर करनी चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त रोशनी और तापमान मिले.
मिट्टी और खेत की तैयारी
कद्दू की फसल के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है.मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए. खेत की अच्छी जुताई कर उसमें गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिलाना फायदेमंद रहता है.खेत को समतल बनाकर नालियां तैयार की जाती हैं ताकि पानी का निकास सही तरीके से हो सके.
बीज की मात्रा और रोपाई
एक हेक्टेयर खेत के लिए करीब 2 से 2.5 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. बीजों को बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना चाहिए ताकि रोगों से बचाव हो सके.पौधों के बीच लगभग 1.5 से 2 मीटर की दूरी रखनी चाहिए जिससे पौधों को फैलने की पर्याप्त जगह मिल सके.
सिंचाई और देखभाल
कद्दू की फसल में नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पानी का जमाव नहीं होना चाहिए.गर्मी के मौसम में 5 से 7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें.पौधों में फूल आने और फल बनने के समय विशेष ध्यान रखना चाहिए.खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहें और जैविक खाद या तरल खाद का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.
कटाई और उत्पादन
कद्दू की फसल बुवाई के लगभग 90 से 120 दिन बाद तैयार हो जाती है. जब फल का रंग गाढ़ा हरा या हल्का पीला हो जाए और उसका छिलका सख्त हो जाए, तो कटाई के लिए उपयुक्त समय होता है. एक हेक्टेयर से औसतन 200 से 250 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है.