Inspirational Story: मां के लिए ऑक्सीजन की एक बूंद ने जगाया पर्यावरण प्रेम! आज लाखों लोगों की इंस्पिरेशन बने शाहबान
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Saharanpur Latest News: सहारनपुर के शाहबान अली एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने विकलांगता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा बना लिया. दोनों पैरों से चलने में अक्षम होने के बावजूद वे आज पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुके हैं.
सहारनपुर: ज़िंदगी में मुश्किलें कभी-कभी इंसान को तोड़ती नहीं, बल्कि गढ़ती हैं. कुछ ऐसा ही किया सहारनपुर के शाहबान अली ने, जो अपने दोनों पैरों से विकलांग हैं. कभी निराशा में डूबे रहने वाले शाहबान आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं. वे अब ए.आर. रहमान नर्सरी में काम करते हैं और सोशल मीडिया पर पर्यावरण प्रेम से जुड़ी अपनी कहानी से लोगों का दिल जीत रहे हैं.
कोरोना काल ने बदली ज़िंदगी की दिशा
शाहबान अली ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान जब उनकी मां को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी और समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई, तब उन्होंने महसूस किया कि पेड़ों की कमी इंसानों के लिए कितनी बड़ी समस्या बन रही है. तभी उन्होंने ठान लिया कि अब वे पेड़ काटने के बजाय पेड़ लगाएंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे.
नर्सरी से शुरू हुआ पर्यावरण प्रेम का सफर
उन्होंने एक नर्सरी में काम करना शुरू किया और वहां पेड़-पौधों की देखभाल करते हुए अपनी वीडियो बनानी शुरू की. जब उन्होंने पहली बार अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर डाली, तो वह रातों-रात वायरल हो गई. इसके बाद उन्होंने लगातार वीडियो बनाना जारी रखा. अब उनके सोशल मीडिया पर 5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं और देशभर से लोग उनसे मिलने आते हैं.
5000 से अधिक पेड़ लगाए
शाहबान अली अब तक 5000 से अधिक पेड़-पौधे लगा चुके हैं और हजारों पौधे निशुल्क लोगों में बांट चुके हैं. उनका मानना है कि हर इंसान को साल में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए. वे पेड़ लगाने के महत्व को वीडियो के जरिए सरल भाषा में बताते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें.
विदेशी पेड़ों की वैरायटी भी मौजूद
शाहबान की नर्सरी में देशी ही नहीं बल्कि विदेशी पेड़ों की भी ढेरों किस्में हैं. उनके पास करीब 1000 से अधिक तरह के पौधे हैं. वे हर पौधे की खासियत को लोगों को समझाते हैं और बताते हैं कि कैसे ये पौधे न सिर्फ वातावरण को बेहतर बनाते हैं बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी लाते हैं.
विकलांगता नहीं, हौसले की मिसाल
शाहबान कहते हैं कि कभी उन्हें लगता था कि वे दूसरों की तरह कुछ नहीं कर सकते, लेकिन अब उन्हें एहसास होता है कि असली ताकत शरीर में नहीं, सोच में होती है. वे अपने दोस्तों के सहयोग से हर काम खुद करते हैं और दूसरों को भी यही संदेश देते हैं कि अगर जज़्बा हो तो कोई कमी मायने नहीं रखती.
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं…और पढ़ें
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मैने शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 ( नेटवर्क 18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News 18 (नेटवर्क 18) के साथ जुड़ी हूं… और पढ़ें