ठंड में जन्नत से कम नहीं UP का यह शहर, आओ-आओ… कहने पर 14620KM का सफर कर आ जाते हैं साइबेरियन बर्ड
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हर साल सर्दियों का मौसम शुरू होते ही सात समंदर पार कर साइबेरियन पक्षियों का समूह संगम तट पर पहुंच जाता है. तट पर हजारों विदेशी मेहमानों के आने से जहां संगम की प्राकृतिक सौंदर्य में और भी निखर आ जाता है. वहीं संगम में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही देशी-विदेशी पर्यटक भी इन विदेशी मेहमानों के कलरव को देखकर खुश हो जाते हैं. संगम तट एक बार फिर से इन विदेशी मेहमानों से गुलजार नजर आ रहा है. इससे संगम आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक बेहद खुश नजर आ रहे हैं. देखिए तस्वीरें…
सर्दियों के मौसम में हर साल संगम तट पर बिल्कुल अलग ही नजारा देखने को मिलता है. सर्दियों में संगम तट पर पानी की सतह सफेद चादर से ढकी नजर आती है. ऐसा दृश्य यहां पर सात समंदर पार से पहुंचने वाले साइबेरियन पक्षियों की वजह से देखने को मिलता है.

संगम के तट पर हजारों की तादात में साइबेरियन पक्षियों के पहुंचने से न केवल यहां की सुंदरता में चार चांद लग जाते हैं. बल्कि पानी की सतह पर कलरव करते ये विदेशी मेहमान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी अपनी ओर बरबस ही आकर्षित करते हैं. यही नहीं यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक संगम में नौका विहार के साथ ही प्रकृति के इस अनुपम सौंदर्य को अपने कैमरे में भी कैद करते संगम तट पर नजर आते हैं.

मुंबई से आई रमसा और रुचिता ने कहा कि हम कॉलेज ग्रुप में आए हैं. हमने इसलिए ही इस समय घूमने का प्लान किया था क्योंकि हमें पता था कि इस समय हमें साइबेरिन वर्ड्स देखने को मिलेंगे. हमने बहुत सारी फोटो ली. नजारा देखकर दिल खुश हो गया.

वहीं पक्षी एवं पर्यावरण विद् डॉ. मोहम्मद आरिफ के मुताबिक, ये विदेशी मेहमान सर्दियों में दो रास्ते से भारत में आते हैं. अगर साइबेरिया से सीधे भारत आते हैं तो 4800 किलोमीटर दूरी तय कर यहां पहुंचते हैं. जबकि झुंड में घूमते हुए 14620 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके भी साइबेरिया से भारत आते हैं.

उनके मुताबिक साइबेरिया से यूरोप के विभिन्न देशों से होते हुए साइबेरियन पक्षियों का समूह अफगानिस्तान, मंगोलिया पहुंचता है. यहीं से ये दो हिस्सों में बंट जाते हैं. साइबेरियन पक्षियों का एक समूह जहां चीन चला जाता है. वहीं दूसरा समूह तिब्बत के रास्ते भारत में प्रवेश कर जाता है.

भारत में साइबेरियन पक्षी राजस्थान के भरतपुर पक्षी विहार, भीरपुर, नरायणपुर कलान, देहरांव और प्रयागराज के संगम तट पर डेरा जमाते हैं. डॉ. आरिफ का कहना है कि साइबेरियन पक्षी 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कई पड़ावों पर ठहरते हुए संगम पहुंचते हैं. सर्दियों में रुस के प्रान्त साइबेरिया में तापमान माइनस से 30 -40 डिग्री में पहुंच जाने पर ये विदेशी मेहमान बिटेट और ब्रीडिंग के लिए गर्म स्थानों की ओर रुख करते हैं. देश में साइबेरियन पक्षी अक्टूबर से मार्च तक का समय विभिन्न इलाकों में बिताते हैं. साइबेरियन बर्ड्स की पूरी दुनिया में करीब 650 प्रजातियां हैं, जिसमें लावरस, साइबेरिया सीगल प्रयागराज में ज्यादा मिलते हैं.

पक्षी एवं पर्यावरण विद् डॉ मोहम्मद आरिफ के मुताबिक, संगम में बढ़ रहे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के चलते इन प्रवासी पक्षियों की संख्या में आयी कमी बेहद चिन्ताजनक है. यह विदेशी मेहमान शाकाहारी और मांसाहारी दोनों होते हैं. इन्हें यहां पर पर्यटक और श्रद्धालु दाना डालते हैं. हालांकि इन दोनों में किसी तरह के मिलावट नहीं होनी चाहिए. नहीं तो यह उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

बहरहाल, हर साल सर्दियों में इन विदेशी मेहमानों के आने से संगम तट की खूबसूरती में जहां चार चांद लग जाते हैं. वहीं हर साल संगम तट पर आने वाले इन विदेशी मेहमानों का लोगों को बड़ी बेसब्री से इंतजार भी रहता है.