सहारपुर में आज भी है शाहजहां के लिए बनाया गया पुल, बाबा लालदास से है कनेक्शन, रोचक है कहानी

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सहारपुर में आज भी है शाहजहां के लिए बनाया गया पुल, बाबा लालदास से है कनेक्शन, रोचक है कहानी


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Sahranpur News: सहारनपुर में शाहजहां के लिए 16वीं सदी में बना ढमोला पुल और शाही मस्जिद आज भी मौजूद हैं. बाबा लाल दास व हाजी शाह कमाल की दरगाह भी वहीं स्थित है.

सहारनपुर: सहारनपुर शुरू से ही ऐतिहासिक रहा है और यहां पर इतिहास से जुड़ी बड़ी-बड़ी चीजें आज भी मौजूद हैं. सहारनपुर में 16वीं सदी में शाहजहां के लिए बनाया गया पुल आज भी मौजूद है. इस पुल पर भारी वाहन वर्जित हैं, लेकिन आज भी इस पुल की मजबूती देखने से ही पता लगती है. शाहजहां जब सहारनपुर में अपनी सेना के साथ बाबा लाल दास से मिलने आए थे, तब उनके लिए इस पुल का निर्माण किया गया था. यह 16वीं सदी की बात है जब शाहजहां ने अपने दो शिष्यों को सहारनपुर में बाबा लाल दास से मिलने और उनकी सच्चाई पता करने के लिए भेजा था. लेकिन दोनों शिष्य यहीं पर ही बाबा लाल दास के मुरीद हो गए थे और रहने लगे थे. उसके बाद शाहजहां को दिल्ली से स्वयं सहारनपुर आना पड़ा और शाहजहां के आने से पहले नदी पर दो पुल बनाए गए थे जो कि एक मुजफ्फरनगर में स्थित है. क्योंकि मुजफ्फरनगर पहले सहारनपुर का ही हिस्सा हुआ करता था और दूसरा पुल सहारनपुर में आज भी मौजूद है. जिसको ढमोला पुल के नाम से जाना जाता है.

वैसे तो यह पुल कभी 30 दराज का हुआ करता था, लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे दोनों साइड से कब्जा हो गया और यह मात्र 10 दराज का रह गया है. साथ ही इस पुल के बराबर में एक शाही मस्जिद का निर्माण भी कराया गया था. इस मस्जिद का निर्माण इसलिए कराया गया था जब शाहजहां यहां पर आए तो वह इस मस्जिद में नमाज अदा कर सके, जो कि आज भी मौजूद है. इसलिए शाहजहां का सहारनपुर से पुराना नाता रहा है. पुरानी धरोहर के रूप में बना यह पुल धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है.

सहारनपुर में आज भी मौजूद है शाहजहां के लिए बनाया गया  पुल

साहित्यकार डॉ वीरेंद्र आज़म ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि सहारनपुर पहले बहुत छोटा सा नगर हुआ करता था. बाबा लाल दास अपने शिष्यों के साथ भ्रमण करते हुए सहारनपुर पहुंचे. कुछ लोग मानते हैं कि उनकी गद्दी पंजाब में भी रही है.  उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैलने लगी.  उस समय शाहजहां का शासन था. कुछ लोगों ने  यह बात दिल्ली दरबार तक पहुंचाई कि आपके शासन में सहारनपुर में एक  फकीर आया है और वह लोगों का धर्म परिवर्तन करा रहा है. तो इस पर शाहजहां ने अपने एक शिष्य को जो बहुत पहुंचे हुए फकीर थे उनको सहारनपुर भेजा और शाहजहां ने जिन फकीर को भेजा था वह भी बाबा लाल दास के पास में झोपड़ी बनाकर रहने लगे. उसके बाद जब वह लौटकर नहीं गए तब फिर लोगों ने शाहजहां से कहा कि आपने जिस फकीर को भेजा था वह लौटकर नहीं आए उनका भी उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया. तब शाहजहां ने उनके यहां एक और सिद्ध फकीर थे हाजी शाह कमाल उनको भेजा. हाजी शाह कमाल ने भी बाबा लाल दास के पास ही अपनी कुटिया बना ली और रहने लगे. आज भी वहां हाजी शाह कमाल की दरगाह बराबर में मौजूद है. बाद में जब हाजी शाह कमाल शाहजहां के पास लौटकर नहीं गए तो फिर लोगों ने शाहजहां से कहा देखो वह फकीर भी वहीं रह गया. तो फिर शाहजहां ने एक समय और एक तिथि निर्धारित की और वह स्वयं सहारनपुर आए. आपको जानकर ताज्जुब होगा कि सहारनपुर से मुजफ्फरनगर के बीच रोहाणा से थोड़ा आगे एक पुल होता था, जिसमें बहुत सारे दरवाजे थे जिसको 52 दरा पुल बोला जाता था. उस पुल का निर्माण उस समय किया गया था जब शाहजहां का सहारनपुर आना था और हमारे शहर सहारनपुर में जो ढमोला का पुल है इसको भी 30 दराज पुल बोलते हैं. इसका निर्माण भी नदी पर शाहजहां के आने के दौरान ही किया गया था. वहीं पुल के बराबर में शाही मस्जिद है, उस मस्जिद का निर्माण किया गया था, ताकि वहां जब शाहजहां आएं तो उसमें नमाज अदा कर सके.

Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें

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