Saharanpur News: नक्शे पर छोटा, आतंकियों की नजर में बड़ा-सहारनपुर क्यों खास? गिरफ्तारियां बढ़ा रही चिंता

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Saharanpur News: नक्शे पर छोटा, आतंकियों की नजर में बड़ा-सहारनपुर क्यों खास? गिरफ्तारियां बढ़ा रही चिंता


सहारनपुर: यूपी के सहारनपुर जिले में जिस तरह एक के बाद एक आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हो रही है, वह यहां की शांति और माहौल के लिए चिंता का विषय है. कभी जैश-ए-मोहम्मद, कभी हिजबुल मुजाहिदीन तो कभी अल-कायदा से जुड़े सदस्य यहां पकड़े जा रहे हैं. इससे आशंका बढ़ती जा रही है कि आतंकी संगठनों के कुछ सदस्य इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और उनकी जड़ें धीमे-धीमे फैल रही हैं.

सहारनपुर पहले भी आतंकियों के लिए एक सुरक्षित शरणस्थल माना जाता रहा है. देश के कई आतंकी मामलों में यहां का कनेक्शन सामने आता रहा है. उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा और राजधानी दिल्ली की नजदीकी होने के कारण भी आतंकियों के लिए यहां आना-जाना आसान रहता है. इसी वजह से सहारनपुर को आतंकवादी अक्सर एक “गलियारे” की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं.

हाल ही में डॉक्टरों के फरीदाबाद मॉड्यूल के खुलासे के बाद एक बार फिर साफ हुआ है कि धार्मिक और भौगोलिक रूप से यह इलाका आतंकियों के लिए मुफीद माना जाता है. डॉक्टर अदील का डॉक्टर की वेशभूषा में रहकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना इस बार सहारनपुर के साथ-साथ डॉक्टरों के पेशे पर भी सवाल छोड़ गया है. ऐसे मामलों के बाद सहारनपुर के अस्पतालों में मुस्लिम डॉक्टरों के लिए काम करना चुनौतिपूर्ण हो सकता है.

इन कारणों से सहारनपुर बना आतंकियों का सुरक्षित अड्डा
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वीरेंद्र आजमने कहा कि सहारनपुर हिमाचल, हरियाणा और उत्तराखंड से सटा जिला है और दिल्ली भी यहां से बेहद करीब है. ऐसे में कई राज्यों में आवाजाही आसान होती है, जिससे आतंकवादी इस क्षेत्र को एक सुरक्षित मार्ग की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं. उन्होंने बताया कि सहारनपुर मिश्रित आबादी वाला इलाका है, इसलिए आतंकवादी यहां आसानी से छिप सकते हैं. सतराना गिरोह से लेकर जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन तक कई संगठनों की गतिविधियों से इस जिले का नाम जुड़ चुका है.

सतराना गिरोह का मामला
सरसावा के पास अपलाना गांव में सतराना गिरोह के आतंकियों का ठिकाना मिला था. पुलिस की घेराबंदी के दौरान थाना अध्यक्ष इस्मा-उल-हक शहीद हो गए थे.

जैश-ए-मोहम्मद (1994)
साल 1994 में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए गाजियाबाद-दिल्ली से चार ब्रिटिश नागरिकों का अपहरण किया था. अपहरण के बाद आतंकियों ने ब्रिटिश नागरिकों को सहारनपुर के खाता खेती क्षेत्र के एक मकान में रखा था. आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने पर पुलिस ने छापा मारा था. इस छापेमारी में इंस्पेक्टर ध्रुव लाल यादव और सिपाही राजेश शहीद हो गए थे.

जमात-ए-मुजाहिदीन (2008 और 2024)
हकीकत नगर में फर्जी पहचान के साथ रहने वाले जासूस और दिसंबर 2024 में देवबंद से पकड़े गए रोहिंग्या नागरिकों के मामले भी इसी संगठन से जुड़े सामने आए.

जैश-ए-मोहम्मद (2019)
यूपी एटीएस व पुलिस की टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सहारनपुर के देवबंद से कश्मीर के दो आतंकियों की गिरफ्तार किया था.

हिजबुल मुजाहिदीन (2025)
एटीएस ने उल्फत हुसैन को पकड़ा था, जो हिजबुल का सक्रिय सदस्य रह चुका था और साल 1999 से 2000 तक पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर में ट्रेनिंग भी ले चुका था.

लाल किले बम धमाका मॉड्यूल लिंक
डॉक्टर अदील, जो सहारनपुर के अस्पतालों में नौकरी कर रहा था, हाल ही में पकड़ा गया. उसके भाई का नाम दिल्ली में हुए धमाके के मॉड्यूल से जुड़ा बताया गया है.



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