रिंग पिट, ट्रेंच या सिंगल बड़? गन्ने की खेती में कौन-सी विधि है सबसे बेहतर? जानें एक्सपर्ट की राय

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रिंग पिट, ट्रेंच या सिंगल बड़? गन्ने की खेती में कौन-सी विधि है सबसे बेहतर? जानें एक्सपर्ट की राय


शाहजहांपुर : उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में धान और गेहूं के साथ गन्ना भी एक प्रमुख फसल है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है. आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. हालांकि, अभी भी कई किसान पारंपरिक तरीकों से गन्ने की खेती करते हैं, जिसमें लागत अधिक और मुनाफा कम होता है. ऐसे में किसानों को नई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकें और अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें. आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि गन्ने की उत्पादकता भी बढ़ा सकते हैं.

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव पाठक ने बताया कि किसान परंपरागत विधि को छोड़कर ट्रेंच विधि, रिंग पिट विधि और सिंगल बड़ विधि जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं. इन विधियों से लागत कम होती है और गन्ने के साथ अन्य फसलें उगाकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त की जा सकती है. सहफसली के माध्यम से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं और गन्ने की खेती को और अधिक लाभकारी बना सकते हैं. इन तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय में बढ़ोतरी कर सकते हैं.

ट्रेंच विधि: सहफसली कर बढ़ेगी कमाई
गन्ने की ट्रेंच विधि पारंपरिक विधि की तुलना में अधिक प्रभावी है. इस विधि में दो लाइनों के बीच 4 फीट की दूरी रखी जाती है, जिससे जमाव 70% से 75% तक होता है और फुटाव भी अच्छा होता है. इस विधि से लगभग 80% कल्ले गन्ने में विकसित होते हैं, जिससे उत्पादन अधिक मिलता है. ट्रेंच विधि में सिंचाई नालियों में की जाती है, जिससे 50% तक पानी की बचत होती है. इस विधि से किसान प्रति हेक्टेयर 1000 से 1800 क्विंटल तक गन्ना उत्पादन ले सकते हैं. साथ ही, लाइनों के बीच अधिक जगह होने से सहफसली करके अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.

रिंग पिट विधि में उत्पादन ज़्यादा, लागत भी ज़्यादा
रिंग पिट विधि गन्ने की खेती में एक प्रभावी तकनीक है, जो अधिक उत्पादन देने में सक्षम है. इस विधि में गड्ढे बनाने के लिए रिंग डिगर की आवश्यकता होती है, जिससे लागत थोड़ी बढ़ सकती है. इसके अलावा, इसमें पारंपरिक विधि की तुलना में लगभग डेढ़ गुना अधिक बीज लगता है. एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विधि में सहफसली करना संभव नहीं है, जो किसानों के लिए एक नुकसान हो सकता है. इन चुनौतियों के बावजूद, रिंग पिट विधि का उपयोग करके गन्ने का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है, लेकिन किसानों को अपनी लागत और लाभ का विश्लेषण करना आवश्यक है.

सिंगल बड़ विधि से 50 गुना तक बीज संवर्धन
सिंगल बड़ विधि गन्ने की खेती के लिए एक किफायती और प्रभावी विकल्प है. इस विधि में नर्सरी तैयार करके कम बीज में अधिक क्षेत्र में रोपाई की जा सकती है. सिंगल बड़ विधि में प्रति हेक्टेयर केवल 20 से 22 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है, जो पारंपरिक विधि की तुलना में बहुत कम है. इस विधि से फुटाव भी अधिक होता है और बीज संवर्धन के लिए भी यह बहुत अच्छी है. सिंगल बड़ विधि से 50 गुना तक बीज संवर्धन किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक विधि में यह 10 गुना ही होता है. इससे किसानों को अधिक मुनाफा हो सकता है.



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