ताजमहल को टक्कर देने आते हैं ये परिंदे, इनकी दुनिया अलग, खातिरदारी में सरकार ने लगा रखे हैं अफसर!

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ताजमहल को टक्कर देने आते हैं ये परिंदे, इनकी दुनिया अलग, खातिरदारी में सरकार ने लगा रखे हैं अफसर!


आगरा. सूर सरोवर पक्षी विहार ताजमहल के बाद आगरा में दूसरा सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला डेस्टिनेशन है. इन दिनों यहां हजारों विदेशी पक्षियों ने दस्तक दे दी है. विदेशी मेहमानों के देखने के लिए दुनियाभर से लोग यहां पहुंच रहे हैं. रुनकता स्थित कीठम झील में प्रकृति का उत्सव देखते ही बन रहा है. यहां दूर देशों से आये हजारों पक्षियों की आवाज से यह स्थान आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस साल सूर सरोवर पक्षी विहार, कीठम झील में रोजी पेलिकन, डालमेशन पेलिकन पेंटेड स्टॉक, डार्टर, नर्थन सोबलर, विश्लिंग टील, कॉम डक, पलाश गुल्स, ब्लैक-नेक स्टॉक ग्रे हॉर्न, सारस क्रेन, बार-हेडेड गूज जैसे मेहमान पहुंच चुके हैं. दूसरे विदेशी पक्षियों का भी इंतजार किया जा रहा है.

यहां तलाश पूरी

सूर सरोवर पक्षी विहार के वन क्षेत्राधिकारी अंकित यादव बताते हैं कि रोजी पेलिकन, डालमेशन पेलिकन पेंटेड स्टॉक, डार्टर, नर्थन सोबलर, विश्लिंग टील, कॉम डक, पलाश गुल्स, ब्लैक-नेक स्टॉक ग्रे हॉर्न, सारस क्रेन, बार-हेडेड गूज जैसे देशी-विदेशी पक्षी यहां आ चुके हैं. पक्षियों को देखने आने वाले पर्यटक बेहद खुश हैं. यहां आकर उनकी तस्वीरें अपने फोन में कैद करते हैं. क्षेत्रधिकारी ने बताया कि फ्लेमिंगो राजहंस भी अगले कुछ दिनों में झील पर उतरना शुरू कर देंगे. बार-हेडेड गूज, जिन्हें दुनिया की सबसे ऊंची उड़ान भरने वाली प्रजाति माना जाता है, वे झील के टापुओं पर घास और जलीय पौधों की तलाश में देखे जा रहे हैं.

उठाये जा रहे सख्त कदम

वन क्षेत्रधिकारी अंकित यादव ने बताया कि विदेशी पक्षियों का यहां विशेष ख्याल रखा जा रहा है. पक्षियों की सुरक्षा टाइट है. झील के आसपास गश्त बढ़ा दी गई है. अत्यधिक शोर को रोकने के लिए तेज आवाज वाले वाहनों, लाउड म्यूजिक और हॉर्न पर रोक है. पर्यटकों को पक्षियों को देखने की अनुमति केवल टाॅवर एक से है, जबकि टाॅवर नंबर 2, 3 और 4 को फिलहाल बंद कर दिया गया है. प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक भोजन बढ़ाने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से झील का जलस्तर कम किया गया है. पानी कम होने पर झील के भीतर उभरने वाले टापू निकल आते हैं, जिस कारण यह स्थल आराम और भोजन का मुख्य आधार बनते हैं. इन टापुओं पर घास, कीट पतंगे, जलीय पौधे और मछलियां अधिक मात्रा में मिलती हैं, जिससे हजारों परिंदों का बड़ा समूह यहां ठहरता रहा है.

पानी की नियमित जांच

झील के पानी की नियमित जांच केंद्रीय जल आयोग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से की जा रही है. गर्मियों में पर्यटकों की संख्या कम रहती है. प्राकृतिक सौंदर्य का यह केंद्र लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है. प्रकृति से प्यार करते वाले पर्यटक अक्सर यहां आते हैं. यह सीजन पक्षियों के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है.



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